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Wednesday, October 21, 2015

आकाशवाणी लखनऊ के टाप ग्रेड कलाकार पं० रमाकान्त पाठक का निधन


आकाशवाणी लखनऊ के पखावज के टाप ग्रेड के कलाकार ,राष्ट्रपति डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा सम्मानित,देश के वरिष्ठ कलाकार मृदंगाचार्य पं० रमाकान्त पाठक का 84 वर्ष की आयु में लखनऊ के एक निजी अस्पताल में 19अक्टूबर को निधन हो गया ।मूलतः उ० प्र० के आजमगढ़ के गोवर्धन पुर गांव के वे निवासी थे ।वर्ष 1961 में आयोजित आकाशवाणी संगीत प्रतियोगिता में अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिलने पर तत्कालीन राष्ट्रपति डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने उन्हें स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया था ।
स्वामी पागल दास जी महाराज के बाद पखावज वाद्य के दूसरे वरिष्ठतम कलाकार पं० रमाकान्त पाठक ने पं० सखाराम मृदंगाचार्य और पं० अयोध्या प्रसाद से प्रारम्भिक प्रशिक्षण पाने के बाद महाराष्ट्र के डा० नाना साहब पनासे घराने और मध्यप्रदेश के कुदऊ सिंह घराने में महारत हासिल की थी ।इन घरानों की खासियत यह है कि पहले घराने में लास्य है तो दूसरे में ताण्डव ।वह जब अपनी मंच प्रस्तुतियां देते थे तो श्रोताओं को एक साथ क्रोध और मुस्कुराहट की अदभुत जुगलबंदी सुनने को मिलती थी जो बरबस ही कानों में शहद घोल जाया करती थी ।
लखनऊ के विश्व प्रसिद्ध भातखण्डे संगीत सम विश्वविद्यालय में पखावज विभाग के विभागाध्यक्ष पद से वर्ष 2007 में वे सेवानिवृत्त हुए थे ।1995 में उनको संगीत नाटक अकादमी का पुरस्कार मिला था ।उन्हें हजारों बन्दिशें मुंहजबानी याद थी ।लखनऊ के अमीनाबाद मुहल्ले में बरसों तक चलने वाली इनकी महफ़िल में बुधई महराज तक शामिल हुआ करते थे ।
आकाशवाणी लखनऊ के संगीत अनुभाग और भातखंडे संगीत सम विश्वविद्यालय में उनकी स्मृति में शोकसभा सम्पन्न हुई जिसमें उनके निधन को संगीत जगत के लिए अपूरणीय हानि बताते हुए वक्ताओं ने अपने अपने संस्मरण सुनाए ।खुद इस ब्लॉग के लेखक ने लगभग दस साल आकाशवाणी लखनऊ की अपनी सेवा में अनेक अवसरों पर उनका सानिध्य पाया था और उनमें एक सिद्ध हस्त कलाकार होने के साथ साथ एक जिन्दादिल इंसान होने का भी विलक्षण गुण पाया था ।

प्रसार भारती परिवार की ओर से उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि ।

ब्लॉग योगदान  - प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी ,लखनऊ  darshgrandpa@gmail.com

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