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Monday, October 26, 2015

जीवन वृत्तान्त-डा० उदयभान मिश्र-प्रस्तुत कर रहे हैं कार्यक्रम अधिकारी प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी ।




कम ही लोगों को यह सौभाग्य मिला है कि उन्होंने भारत सरकार के प्रकाशन विभाग , दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे प्रतिष्ठित तीनों संचार माध्यमों में अपनी सेवाएँ दी हों ।डा० उदयभान मिश्र उन्हीं चंद लोगों में शुमार हैं ।आइये सेवानिवृत्त के बाद की उनकी जिन्दगी से हम आपको रू-ब-रू कराते हैं ।प्रसार भारती ब्लॉग के लिए उनका जीवन वृत्तान्त प्रस्तुत कर रहे हैं उनके साथ लम्बी अवधि तक काम कर चुके आकाशवाणी के पूर्व कार्यक्रम अधिकारी प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी ।

"कोयला और हीरा एक ही पदार्थ से निर्मित होते हैं लेकिन कितने अलग ,कितने दूर !वैसे ही मनुष्य भी एक जैसे तत्वों से निर्मित होकर कभी कोयला हो कर रह जाता है तो कभी हीरा बन कर ख्याति पाता है "- यह विचार है ख्यातिलब्ध साहित्यकार विष्णु प्रभाकर का । मेरा मानना है कि आकाशवाणी की सेवा या उसके सानिध्य में आया हर मनुष्य हीरा बनकर समाज में अपनी चमक बना लेता है और हीरा जिस तरह हमेशा आभूषणों में
" हीरो " हुआ करता है उसी प्रकार ये विभूतियाँ भी समाज में हीरो हुआ करती हैं, चाहे अपने सेवाकाल में और चाहे रिटायरमेंट के बाद !

आज मै आपको ऐसे ही एक विशिष्ट व्यक्ति डा०उदयभान मिश्र जी के बारे में बताने जा रहा हूँ ।
15फरवरी 1937 को गोरखपुर के उप नगर बड़हलगंज के एक गांव बसावनपुर में जन्मे डा० मिश्र ने 1975 में भारत सरकार की प्रकाशन विभाग की पत्रिका "आजकल"के सम्पादकीय को छोड़ कर 2अप्रैल 1975 को आकाशवाणी दिल्ली में बतौर कार्यक्रम अधिकारी नौकरी संभाली । उसके बाद पदोन्नति पाते हुए गोरखपुर, दिल्ली, उदयपुर, लखनऊ आदि के आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों पर निदेशक के रूप में अपनी सेवाएँ दीं ।28फरवरी 1995 को आकाशवाणी गोरखपुर से वे 31 साल की सेवा के बाद केन्द्र निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए ।
स्वभाव से सैनिक और लेखनी से श्रमजीवी के रूप में अपनी शुरूआती पहचान बनाने वाले डा० मिश्र आज भी समाज को अपनी ऊर्जावान साहित्यिक सेवाएं दे रहे हैं ।गोरखपुर में स्थाई रूप से रहते हुए उन्होंने अब तक कविता, कहानियाँ, ऊपन्यास, यात्रा वृतांत, आलोचना सम्बन्धित लगभग दो दर्जन पुस्तकें लिखीं है और अभी भी उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैं ।चमत्कृत कर देने वाली उनकी भाषा शैली और उनका ओजपूर्ण संवाद किसी को भी उनकी ओर सहज ही सम्मोहित कर लेती है ।

आकाशवाणी और दूरदर्शन में रहते हुए अनेक ख्याति लब्ध कार्यक्रम देनेवाले इन जैसे महानुभावों से नई पीढ़ी दिशानिर्देश ले सकती है ।ब्लॉग रिपोर्टर को उनसे अपनी सेवाकाल और बाद की अवधि में उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है ।नि: सन्देह ऐसी कालजयी विभूतियों पर प्रसार भारती परिवार को गर्व है । अपनी पुस्तक "रामग्राम से कामाख्या तक " में इनका कहना है -" एक बात मै बहुत अच्छी तरह जानता हूँ कि चाहे कोई भी ईश्वर हो वह मनुष्य के बाहर नहीं हैं, मनुष्य के भीतर ही हैं ।इसीलिए मनुष्य को अपना सम्मान करना चाहिए... मै इन अर्थों में घोर आस्तिक और घोर आध्यात्मिक हूँ ।" * * *
डा० उदयभान मिश्र के निवास का पता है -"सिद्ध वास",
जी-27,राप्ती नगर चतुर्थ चरण ,पोस्ट-चरगांवां, जिला-गोरखपुर-273001 और मोबाइल नं० है 09450677974
 ब्लॉग योगदान : प्रफुल्ला  कुमार त्रिपाठी लखनऊ darshgrandpa@gmail.com

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