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Tuesday, April 19, 2016

श्री नित्यानंद मैठाणी पूर्व निदेशक आकाशवाणी से एक मुलाकात

आकाशवाणी के पूर्व निदेशक श्री नित्यानंद मैठाणी ने आकाशवाणी लखनऊ से अपने जुड़े संस्मरणों को विगत दिनों उनके आवास पर हुई इस ब्लॉग रिपोर्टर से मुलाकात में साझा किया है ।उसी का अंश, आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूँ ।

"आकाशवाणी लखनऊ का आरम्भ 2 अप्रेल 1938 के दिन हुआ था। विभाजन के पहले देश में नौ आकाशवाणी केन्द्र थे। विभाजन के पश्चात छः केन्द्र भारत के हिस्से में आये। लखनऊ के आकाशवाणी केन्द्र का विभाजन से पूर्व और बाद में भी अपना एक विशिष्ट स्थान बना रहा। मैंने 13 जनवरी 1958 को एक कलाकार के रूप में आकाशवाणी के जम्मू केन्द्र पर कार्य करना आरम्भ किया था। अखिल भारतीय प्रतियोगिता में सफल होने के पश्चात 12 अक्टूबर 1959 के दिन से वही़ं पर पुनः सेवा का अवसर मिला। वहीं से श्रीनगर (कश्मीर) स्थानान्तरित होने के पश्चात जम्मू- कश्मीर में कार्य करता रहा और 1964 में आकाशवाणी के लखनऊ केन्द्र पर कार्य करने आया। इस समय ‘उत्तरायण’ कार्यक्रम प्रसारित होने लगा था। फिर लगभग सभी पदों पर सेवा करने का अवसर मिला। आठ वर्षों तक भारत के विभिन्न केन्द्रों पर केन्द्र निदेशक का कार्य भी किया। लखनऊ के तो कई केन्द्र निदेशकों, परमेश्वर माथुर, के.के माथुर, के.के. नटवर, लियाकत जाफरी, गिरीश चतुर्वेदी, अमीक हनफी, दिलीप कुमार, सेना गुप्ता इत्यादि के साथ भी मुझे काम कर सीखने-समझने का समय-समय पर अवसर मिला।इस केन्द्र की स्वर्ण जयंती जब मनाई गई थी तो मैंने अपने मित्र मदन मोहन सिंह ‘मनुज’, तत्कालीन केन्द्र निदेशक, लखनऊ द्वारा भिजवाई गई आकाशवाणी लखनऊ की ‘स्वर्ण जयन्ती स्मारिका’ बड़े मनोयोग से पढ़ी थी । स्वर्ण जयन्ती समारोह में अनुज के आमंत्रण के बावजूद मैं नहीं जा पाया था। उस समय दुख और आश्चर्य हुआ कि स्मारिका में उत्तराखंड का जिक्र तक नहीं था। आकाशवाणी नजीबाबाद का उद्घाटन दिनांक 27-1-78 को हुआ था। उसके बाद ही उत्तराखंड आकाशवाणी के लखनऊ केन्द्र से अलग हुआ था। बाद में अल्मोड़ा केन्द्र की स्थापना हुई।
बहरहाल आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं ।अगर हम सभी जीवित और समर्पित लोगों को बुलाकर समय समय पर मिलने जुलने का भी अवसर जाय तो इस समय काम कर रही नई पीढ़ियों से भी हम सबका परिचय और वैचारिक विनिमय हो पाता ।"ज्ञातव्य है श्री मैठाणी की एक सचित्र पुस्तक मलिका ए गज़ल बेगम अख़्तर पर प्रकाशन की प्रक्रिया में है और वे तन्मयता से इस काम में इन दिनों लगे हुए हैं ।

ब्लॉग रिपोर्ट- प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, लखनऊ; मोबाइल नंबर9839229128

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