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Tuesday, July 26, 2016

"हिम्मत वतन की हमसे है...!"वह धारावाहिक जो मिसाल बन गया !

जिन दिनों कारगिल में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ने "आपरेशन फ्लश आउट "और "आपरेशन विजय"का ऐलान किया और सेना ने बोफोर्स की मदद से और वायुसेना ने 18हजार फीट की ऊंचाई की बर्फ़ से ढ़ंकी दुर्गम मानव विहीन पहाड़यों पर अपना सबसे सघन अभियान शुरू किया था उस समय भारतीय युवा भी जोश ओ जुनून से लबरेज हो उठे ।आकाशवाणी गोरखपुर में मैं उन दिनों "युववाणी"देख रहा था और मेरे पास लगभग दो दर्जन नौजवान युवक युवतियों की टीम कैजुअल कम्पियरों की थी ।मेरे सहयोगी कार्यक्रम अधिकारी श्री हसन अब्बास रिज़वी के कारगिल प्रवास के अनुभवों के सहारे हमनें अपने युवा श्रोताओं के लिए उन्हीं दिनों लगभग तीस मिनट का दैनिक रुपकात्मक कार्यक्रम शुरु किया- "हिम्मत वतन की हमसे है।"लगभग एक महीने तक इसका नियमित प्रसारण होता रहा ।इसमें केन्द्र के नियमित उदघोषकों ,यथा ,श्री सर्वेश दुबे,सुनीता कांजिलाल,मोहसिना ख़ान,उदिता श्रीवास्तव आदि सभी ने अपने स्वर दिए ।कोशिश यह रहती थी कि हम कारगिल की स्थिति से श्रोताओं को अपडेट रख सकें ।मुझे याद है(और आज भी मेरे रिकार्ड में रखा है)कि मैनें उन्हीं दिनों लिखा था;
."....अभी भी तेरी कथनी कुछ है,
और करनी कुछ..
तेरे उग्रवादी संगठन,
कश्मीर घाटी में अपनी घटिया हरकतों से
बाज नहीं आ रहे हैं
जबकि हर मोर्चे पर
मुंह की खा रहे हैं..
अरे ओ दग़ाबाज
अब सुन सारी दुनियां की आवाज़
आवाज़ अमन चैन की
आवाज़ एक ही धरती मां की
एक ही परिवार की संकल्पनाओं की..."
अंतिम एपिसोड के समापन ,जो संभवत:आपरेशन विजय की पूर्ण सफलता की अपने प्रधान मंत्री जी की उदघोषणा 14जुलाई के बाद प्रसारित किया गया था,में हमनें शायर सुलेमान मसरुर के इस शेर का उपयोग किया था;
"ढेर बारुद का चट्टान में है,
ज़िन्दगी आज इम्तिहान में है ।
कोई ललकार कर हमें देखे,
सरफ़रोशी हमारी आन में है ।।"
इस युद्ध ने भारतीय युवाओं में भारतीय सेना के प्रति भी सम्मोहन जगाया ।हर नागरिक विशेषकर युवाओं में देशप्रेम की ललक साफ साफ दिखने लगी ।आज,इतने सालों बाद वे रोमांचक दिन और कार्यक्रम एक बार फिर मानों चलचित्र सा सामने दिखाई देने लगे हैं ।आगे के कुछ ही बरस बाद मेरे निजी जीवन में भी मेरी दो संतानें ,मेरे दो पुत्रों ने इसी सरफरोशी की अलख को जगाते हुए भारतीय सेना को अपनी सेवाओं के लिए चुना ।बड़ा आज मेजर (मेजर दिव्य आदित्य) है और छोटे लेफ्टिनेन्ट यश आदित्य नें मात्र 23साल की उम्र में सेना में आन ड्यूटी अपनी शहादत देकर धरती मां की सेवा को मूर्त रूप दे दिया ।इन सभी की शहादत को नमन !
ब्लाग रिपोर्टर :-  श्री. प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी,लखनऊ।मोबाइल 9839229128 
darshgrandpa@gmail.com

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