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Sunday, October 2, 2016

विविध भारती सेवा का 59 वा स्थापना दिवस

विविध भारती भारत मे सार्वजनिक क्षेत्र के रेडियो चैनल आकाशवाणी की एक प्रमुख प्रसारण सेवा है। भारत में रेडियो के श्रोताओं के बीच ये सर्वाधिक सुनी जाने वाली और बहुत लोकप्रिय सेवा है। इस पर मुख्यत: हिन्दी फ़िल्मी गीत सुनवाये जाते हैं। विविध भारती सेवा का शुभारंभ 2 अक्टूबर 1957 में हुआ। प्रसारण की शुरुआत 3 अक्टूबर 1957को हुई थी। वर्ष 2006-2007, विविध भारती के स्वर्ण जयंती वर्ष के रूप मे भी मनाया। प्रारम्भ मे इसका प्रसारण केवल दो केन्द्रों, बम्बई तथा मद्रास से होता था। बाद मे धीरे धीरे लोकप्रियता के चलते आकाशवाणी के और भी केन्द्र इसका प्रसारण करने लगे। वर्तमान मे अनेकानेक केन्द्र आकाशवाणी की विज्ञापन प्रसारण सेवा के रूप मे अपने श्रोताओं को विविध भारती के कार्यक्रम सुनवाते हैं। यह भारत के असंख्य हिन्दी भाषियों का चहेता रेडियो चैनल वर्षों तक रहा। तब भी जब कि ना तो दूरदर्शन भारत आया था, या आने के बाद भी इतना चहेता नहीं बना था, जितना कि यह चैनल रहा है। अब भी यह चैनल अखिल भारत में प्रसारित होता है।
भारत में रेडियो प्रसारण का आरंभ 23 जुलाई 1927 को हुआ था। आज़ादी के बाद भारत भर में कई रेडियो स्‍टेशनों का बड़ा नेटवर्क तैयार हुआ। पचास के दशक के उत्‍तरार्द्ध में आकाशवाणी के प्राईमरी-चैनल देश के सभी प्रमुख शहरों में सूचना और मनोरंजन की ज़रूरतें पूरी कर रहे थे। किन्‍हीं कारणों के रहते तब आकाशवाणी से फिल्‍मी–गीतों के प्रसारण पर रोक लगा दी गयी थी। ये फिल्म-संगीत का सुनहरा दौर था। फिल्‍म जगत के तमाम कालजयी संगीतकार एक से बढ़कर एक गीत तैयार कर रहे थे। उन दिनों श्रीलंका ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन की विदेश सेवा, जिसे हम और आप रेडियो सीलोनके नाम से जानते हैं, हिंदी फिल्‍मों के गीत बजाती थी और अपने प्रायोजित कार्यक्रमों के ज़रिये तहलका मचा रही थी। ऐसे समय में आकाशवाणी के तत्‍कालीन महानिदेशक गिरिजाकुमार माथुर ने पंडित नरेंद्र शर्मा, गोपालदास, केशव पंडित और अन्‍य सहयोगियों के साथ एक अखिल भारतीय मनोरंजन सेवा की परिकल्‍पना की। इसे नाम दिया गया विविध भारती सेवा। आकाशवाणी का पंचरंगी कार्यक्रम। यहां पंचरंगी का मतलब ये था कि इस सेवा में पांचों ललित कलाओं का समावेश होगा। तमाम तैयारियों के साथ 3 अक्‍तूबर, 1957 को विविध भारती सेवा मुंबई में शुरू की गयी। विविध भारती पर बजा पहला गीत पंडित नरेंद्र शर्मा ने लिखा था और संगीतकार अनिल विश्‍वास ने स्‍वरबद्ध किया था। इसे प्रसार गीत कहा गया और इसके बोल थे नाच मयूरा नाच। इसे मशहूर गायक मन्‍ना डे ने स्‍वर दिया था। आज भी ये गीत विविध भारती के संग्रहालय में मौजूद है। अखिल भारतीय मनोरंजन सेवा विविध भारती की पहली उदघोषणा शील कुमार ने की थी। आगे चलकर इस श्रेणी में जो अविस्मरणीय नाम जुड़ा वह था अमीन सयानी का।

विविध भारती सेवा का स्‍टूडियो मुंबई में था। देश भर के बहुत काबिल निर्माताओं और उदघोषकों को विविध भारती के लिए बुलवाया गया था। ताकि आकाशवाणी की ये मनोरंजन सेवा शुरू होते ही बेहद लोकप्रिय हो जाये। विविध (भारती) असल अंग्रेज़ी के मिस्लेनियस शब्द का हिन्दी अनुवाद है, जो पं॰ नरेन्द्र शर्मा ने इस नई सेवा को दिया था, जब उन्हें 50 के दशक में फ़िल्मी लेखन से रेडियो में बतौर अधिकारी बुलाया गया। जयमाला और हवामहल विविध भारती के शुरूआती कार्यक्रम रहे हैं। ये कार्यक्रम आज पचास सालों बाद भी उतनी ही लोकप्रियता के साथ चल रहे हैं। हवामहल नाटिकाओं और झलकियों का कार्यक्रम है। पहले ये रात सवा नौ बजे हुआ करता था। आज इसका समय है रात आठ बजे। हवामहल के लिए झलकियां और नाटक देश भर से तैयार करके भेजे जाते हैं। एक समय में फिल्मी कलाकार असरानी, ओम पुरी, ओम शिवपुरी, अमरीश पुरी, दीना पाठक, यूनुस परवेज़ जैसे कई नामी कलाकारों ने हवामहल के नाटकों में अभिनय किया है। हवामहल की कई झलकियां आज भी लोगों की स्‍मृतियों में हैं। इसकी खास तरह की संकेत-ध्‍वनि लोगों को अभी भी नॉस्‍टेलजिक बना देती है। जयमाला विविध भारती का गौरवशाली कार्यक्रम रहा है। इसमें देव आनंद, धर्मेंद्र, राजकुमार, शशि कपूर और अमिताभ बच्‍चन समेत कई नामचीन कलाकार फौजी भाईयों से अपने मन की बात कह चुके हैं। अभिनेत्री नरगिस ने विविध भारती पर पहला जयमाला कार्यक्रम पेश किया था। इसके बाद तो फौजी भाईयों के इस कार्यक्रम में आशा पारेख, माला सिन्‍हा, वहीदा रहमान, हेमा मालिनी से लेकर अमृता राव तक कई तारिकाएं शामिल हो चुकी हैं।

जयमाला से फौजियों का प्‍यार जगज़ाहिर रहा है। जब कारगिल युद्ध हुआ तो विविध भारती फौजी भाईयों के लिए एक माध्‍यम बन गया, फौजियों ने अपनी सलामती के संदेश ‘हैलो जयमाला’ के माध्‍यम से अपने परिवार वालों तक पहुंचाए थे। विविध भारती ने अपनी लोकप्रियता का ज़बर्दस्‍त दौर देखा है। सन 1967 से विविध भारती पर विज्ञापन प्रसारण सेवा का आरंभ हुआ। इसके बाद से विज्ञापनों के लिए हमारे दरवाज़े खोल दिये गये। विज्ञापनदाआतों को विविध भारती एकमात्र ऐसा चैनल लगता था जिसके ज़रिए वो देश के कोने-कोने तक पहुंच बना सकते थे। विज्ञापन प्रसारण सेवा के आने के बाद प्रायोजित कार्यक्रमों का इतिहास शुरू हुआ। जिसमें बिनाका गीत माला, एस कुमार्स का फिल्‍मी मुक़दमा, मोदी के मतवाले राही, सेरिडॉन के साथी, इंस्‍पेक्‍टर ईगल जैसे अनेक रेडियो कार्यक्रम उतने ही लो‍कप्रिय थे जितने आज के टी वी धारावाहिक। विविध भारती के विज्ञापन प्रसारण केंद्र लगातार बढ़ते चले गये। ऐसे केंद्रों ने स्‍थानीय ज़रूरतों को भी पूरा किया और विविध भारती के मुंबई से‍ किये जाने वाले प्रसारणों को भी जनता तक पहुंचाया। आज भी विज्ञापनदाता अपनी वस्‍तुओं और सेवाओं के प्रचार के लिए विविध भारती का सहारा लेते हैं। फिल्‍मों के प्रचार के लिए भी विविध भारती एक बेहतरीन माध्‍यम सिद्ध हुआ है। विविध भारती हमेशा बदलते हुए दौर के साथ चलती रही है। एक जमाने में विविध भारती के कार्यक्रमों के टेप विज्ञापन प्रसारण सेवा के केंद्रों पर भेजे जाते थे। और वहां से उनका प्रसारण होता था। फिर उपग्रह के जरिए फीड देने की परंपरा का आरंभ हुआ। आज किसी भी ताज़ा घटनाक्रम या सूचना को विविध भारती के कार्यक्रमों में तुरंत शामिल कर लिया जाता है। पिटारा, सखी सहेली, मंथन, यूथ एक्‍सप्रेस, उजाले उनकी यादों के, संगीत-सरिता यह वर्तमान   में प्रसारित होने वाले कुछ लोकप्रिय कार्यक्रम है।

आज विविध भारती डी टी एच यानी डायरेक्‍ट टू होम सेवा के ज़रिए चौबीसों घंटे उपलब्‍ध है। बेहतरीन स्‍टीरियो क्‍वालिटी में आप अपनी टीवी सेट पर विविध भारती का अबाध प्रसारण चौबीसों घंटे सुन सकते हैं। दिन भर विविध भारती शॉर्टवेव, मीडियम वेव और एफ एम पर भी उपलब्‍ध रहती है। विविध भारती सेवा के कार्यक्रम रात ग्‍यारह बजे के बाद राष्‍ट्रीय प्रसारण सेवा यानी नेशनल चैनल से भी प्रसारित किये जाते हैं। यानी अगर आपके पास डी टी एच सेवा नहीं है तो भी विविध भारती आपकी चौबीसों घंटे की हमसफर है। विविध भारती के प्रसारण पूरे भारत के अलावा पाकिस्‍तान,श्रीलंका, नेपाल, बांग्‍लादेश सहित दक्षिण पूर्वी एशिया के कई देशों में सुने जा रहे हैं। इसका सुबूत हैं इसके फोन इन कार्यक्रमों में खाड़ी देशों से आने वाले फोन कॉल्‍स। खाड़ी देशों में रह रहे भारतवासी या एशियाई लोग बड़े चाव से विविध भारती का आनंद लेते हैं। चूंकि लगभग एक सौ दस स्‍थानीय एफ एम चैनल विविध भारती सेवा के कार्यक्रमों को अपनी दिन के प्रसारणों का हिस्‍सा बनाते हैं इसलिए बहुत छोटे छोटे कस्‍बों और गांवों में भी विविध भारती ने अपनी गहरी पैठ बनाई है। 
2 अक्टूबर 2016 के दिन विविध भारती सेवा 59 वा स्थापना दिवस मना रही है। प्रसार भारती परिवार इस अवसर पर विविध भारती के सभी अधिकारी और कर्मचारीयों को बधाई देता है।  अपने कार्य के प्रति उनकी निष्ठा को सलाम करता है और ऐसे ही खूबसूरत कार्यक्रमों के निर्माण की अपेक्षा करता है। 
स्त्रोत :- https://en.wikipedia.org/wiki/Vividh_Bharati

3 comments:

  1. इस लेख में एक सaaब से बड़ी अशुद्धि है जिस के बारे में अनेक बार पहले भी लिख चुका हूँ - लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं देता - लेख में १९५७ में आकाशवाणी महानिदेशक का नाम गिरिजा कुमार माथुर दिया जाता है जो गलत है - उस समय महानिदेशक स्व० जगदीश चन्द्र माथुर थे - वे ICS थे गिरिजा कुमार माथुर १९७६ में डायरेक्टर पद से रिटायरउन हुए हैं - इस से पहले मैं इसी विषय पर काफी विस्तार से लिख चुका हूँ - लेकिन वही ढाक के तीन पात

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  2. विविध भारती के सभी अधिकारी और कर्मचारीयों को बधाई ......

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  3. एस. एम. चौधरीOctober 3, 2016 at 10:50 AM

    आकाशवाणी विविध भारती परिवार को हार्दिक बधाई के साथ शुभकामनाएँ ।

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