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Saturday, October 1, 2016

रचना : संगीत संयोजन में बसंत सी मादकता बिखेरते वयोवृद्ध संगीतकार एच. वसंत !

लखनऊ अपनी नज़ाकत,नफ़ासत और शराफ़त ही नहीं अपनी समृद्धशाली संगीत परम्परा के चलते भी पूरे विश्व में हमेशा से सुर्खियां बटोरता रहा है । अपने जीवन के उत्तरार्द्ध में मैनें भी इस शहर के मूल निवासियों के नाज़ुक मिजाज,अदब -ओ- लिहाज,मौसिक़ी के प्रति दीवानगी और रिश्तों की गर्माहट को बेहद क़रीब से महसूस किया और देखा है।आकाशवाणी लखनऊ में रहकर संगीत विभाग कार्यक्रम को लगभग एक दशक तक देखने के दौरान मैनें लखनऊ और आसपास के संगीत और उनसे जुड़े लोगों की दुनियां को भी नजदीक से देखा सुना है ।ख़याल गायकी,जबड़े की तान के चलन,बोल बनाव की ठुमरी,कथक नृत्य आदि संगीत की अनेक विधाएं जो यहीं से पैदा हुईं वे अपनी बुलंदी की ओर आज भी कदम बढ़ा रही हैं।उन्हें आगे बढ़ाने में एक से एक सिद्धहस्त कलाकार अब भी दिन- रात तत्पर हैं।सभी जानते हैं कि अवध की सोज़ख्वानी परंपरा आज भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।विशुद्ध रागिनियों में बांधकर मर्सिया व सोज़ख्वानी को गाने की परम्परा नवाब शुजाउद्दौला(1754-1775) के शासन काल में फै़जाबाद से शुरु हुई थी ।दरगाहों में इससे पहले से ही क़व्वाली गाने की परम्परा चली आ रही थी।नवाब वाजिद अली शाह के शासन काल में संगीत अपने चरम पर था।जिस तरह से किसी ज़माने में लखनऊ सभी कलाकारों का तीर्थ बन चुका था उसी तरह कालांतर में आज यहां का भातखंडे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय संगीत के शौकीन उत्तर भारतीय युवा कलाकारों का तीर्थ बना हुआ है इसमें कोई संदेह नहीं ।
आकाशवाणी लखनऊ से जुड़े अनेक विभागीय या सूचीबद्ध संगीत संयोजकों में से कुछेक आज भी संगीत की उसी शाश्वत परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं जिसके लिए अवध मशहूर था ।कुछेक ऐसे भी हैं जो आज के समय को देखते हुए परम्परा से हटकर अपनी माडर्न कम्पोजिशन युवाओं को सिखा रहे हैं ।लखनऊ के संगीत की उसी शालीन और शाश्वत परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं 82वर्षीय वयोवृद्ध वरिष्ठ संगीत संयोजक एच0वसंत ।उनकी एक विशेषता यह भी है कि उनके साथ किसी प्रोजेक्ट से जुड़ने के लिए आज भी नई और पुरानी पीढ़ी के कलाकार लालायित रहते हैं।

मूलत:मेंगलोर,कर्नाटक के निवासी वसंत दादा का जन्म 10अगस्त 1934को हुआ था ।बी0एस0सी0तक की शिक्षा दीक्षा मेंगलोर में ही हुई ।बचपन से ही संगीत उनके मन में रच बस गया था ।30वर्ष की उम्र में 1964में पहले उन्होंने वोकलिस्ट के रुप में बम्बई की फिल्मी दुनियां में क़दम रखा ।वहीं मशहूर संगीतकार सी0रामचन्द्र के प्रथम सहायक स्व0दत्ता डावजेकर से इन्होंने फ़िल्मों में पार्श्व संगीत संयोजन का क ख ग सीखा और फिर आगे चलकर कम्पोजर के रुप में बतौर सहायक वे अपनी संगीत संयोजन की प्रतिभा को भी उस समय के कई नामचीन संगीत निर्देशकों के साथ धार देते रहे ।इनकी विशिष्टता आर्केस्ट्रा पर भारतीय शास्त्रीय संगीत और पाश्चात्य संगीत का बेहतर तालमेल करते हुए धुन तैयार करना था ।जननी जन्मभूमि,मवाली,चार दोस्त(हिन्दी)सखू आली,पंढरपुरा(मराठी)आदि फिल्मों में इन्होंने अपनी संगीत रचनाएं दीं ।सर्वश्री एस0एन0त्रिपाठी,चित्रगुप्त,प्रेम धवन,रत्ता द्वजेकर,हृदय नाथ मंगेशकर आदि के साथ कई हिन्दी फिल्मों में अपना योगदान देते हुए उन्होंने एक अलग पहचान क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में संगीत देते हुए बनाया ।मराठी,कन्नड़,गुजराती,पंजाबी आदि की क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों में संगीत देते हुए 1971में उन्हें बिड़ला ग्रुप आफ़ कम्पनीज की ओर से लखनऊ आकर एक कार्यक्रम तैयार करने का प्रस्ताव मिला ।हालांकि तब तक बम्बई में उनका पांव जम चुका था लेकिन अन्तत: 1974 में उन्हें उसी प्रयोजन से लखनऊ आना ही पड़ा ।और लखनऊ में काम करते हुए लखनऊ के लोग और यहां की सरज़मीं ने उन्हें सम्मोहित कर लिया और फिर तो वे यहीं के होकर रह गये ।1976 में आकाशवाणी लखनऊ ने उन्हें सीधे ग्रेड-1म्यूजिक कम्पोजर के रुप में अपने पैनल में स्थान दिया ।उन दिनों आकाशवाणी लखनऊ का कोरल ग्रुप पूरे देश में अपना कीर्तिमान रच रहा था ।वसंत दा के योगदान से एक से एक उत्कृष्ट वृन्दगान कम्पोज़ होकर आकाशवाणी के लगभग सभी केन्द्रों से प्रसारित होने लगे ।लखनऊ दूरदर्शन भी उन्हीं दिनों शुरु हुआ और इनकी सेवाओं को और भी पंख मिले ।एक सीरियल "बीबी नातियों वाली" के सभी एपिसोड में वसंत दा की चमत्कारी संगीत कम्पोजिशन दिखी ।आगे चल कर उन्हें आकाशवाणी और दूरदर्शन के आडिशन बोर्ड का सदस्य भी नामित किया गया ।अभी पिछले दिनों उ0प्र0सरकार ने उन्हें उनके संगीत के क्षेत्र में योगदान को देखते हुए संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार से भी नवाजा है । संगीत नाटक अकादमी के एक विशेष त्रिदिवसीय आयोजन "स्वर सुधा " में 14मार्च 2016को लगभग तीन दर्जन कलाकारों (गायक-वादक) को लेकर इन्होंने ओजपूर्ण देशभक्ति रचनाएं अपने संगीत संयोजन में पेश करके सभी को हतप्रभ कर दिया ।इस उम्र में भी इनके दम- खम को देखकर सेवानिवृत्त वरिष्ठ समाचार वाचिका और गायिका श्रीमती निर्मला कुमारी इन्हें अपने आपमें संगीत जगत की एक संस्था मानती हैं।बहुमुखी प्रतिभा वाली पत्नी कल्पना जी हमेशा से उनका पूरा ध्यान रखती हैं और बेटे गुंजन वसन्त के साथ अभी भी वसंत दा अपने स्टूडियो में बैठकर खु़द तो रियाज़ करते ही हैं शिष्यों को संगीत के गायन- वादन और कम्पोजिशन की तालीम भी बांटते हैं ।अनेक गुणीजनों की तरह वसंत दा में भी उच्चतम मानवीय मूल्य भरपूर मात्रा में उपलब्ध है।मेरे युवा शहीद बेटे लेफ्टि0यश आदित्य की शहादत की चौथी सालगिरह पर उन्होंने एक म्यूजिकल वीडियो एलबम बनाकर मुझे हतप्रभ करते हुए मेरी भावनाओं का सम्मान किया था जिसके बोल थे-"दूर हो हमसे बहुत फिर भी हमारे पास हो,तुम अमर विश्वास हो यश,तुम अमर विश्वास हो।" प्रसार भारती ब्लाग के लिए मुझसे बातचीत में उन्होंने संगीत के सात स्वरों की विलक्षण व्याख्या की है जो इस ब्लाग के पाठकों से शेयर करना चाहूंगा;
सा-षडज,षड+अज=छ स्वरों को जन्म देने वाला अर्थात समाज को बढ़ाना ।
रे-रिषभ=रियाज़ अर्थात मेहनत करने का संकेत ।
ग-गांधार,गान+आधार अर्थात ग़म पड़ना,ख़बर पड़ना ।
म-मध्यम अर्थात मन का स्थिर होना ।
प-पंचम ,अर्थात परमेश्वर की ओर बढ़ना ।
ध-धैवत,ध्यान लगाना अर्थात लग जाना ।
नि-निषाद,आदि निगमा दिन का ज्ञान अर्थात समाधि ।
सा-जहां से आया वहां पहुंचना अर्थात मुक्ति ।
संगीत को अपनी जीवन यात्रा से जोड़कर चलने और समझने का इससे बेहतर माध्यम और क्या हो सकता है !शायद इसीलिए उत्तम चैटर्जी ,मुक्ता चैटर्जी,निर्मला कुमारी,अनिमेष मुकर्जी,देवेश चतुर्वेदी,अल्पना मेहरोत्रा,मांडवी सिंह,शोभित,श्रीकांत श्रीवास्तव,ओ0विश्वास लायल,मनोज बनर्जी जैसे लखनऊ के ढेर सारे कलाकार उनसे अब भी जुड़े रहना चाहते हैं।वसंत दा अपने शिष्यों को प्राय: दार्शनिक प्लेटो की इस बात का उद्धरण दिया करते हैं- "Music gives a soul to the universe,wings to the mind,flight to the imagination and life to everything." उनके पिछले जन्मदिन पर संस्कार भारती ने उनका भरपूर सम्मान किया है ।प्रसार भारती परिवार ऐसे वयोवृद्ध संगीतकार वसंत दा की इन मूल्यवान सेवाओं की सराहना करता है और उनके शेष जीवन के लिए बेहतर स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना करता है। उनका आवासीय पता है-सी025/1,पेपर मिल कालोनी,निशातगंज,लखनऊ-226006,फोन नं0है-0522 2335124,9415110264 ईमेल आइ.डी. है vasant1034@gmail.com
पाठक संगीत से जुड़ी अपनी जिज्ञासा उनसे शेयर कर सकते हैं ।

ब्लाग लेखक - श्री. प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी,सेवा निवृत्त कार्यक्रम अधिकारी,आकाशवाणी,लखनऊ।मोबाइल नं0 9839229128  darshgrandpa@gmail.com

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