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Friday, October 7, 2016

आकाशवाणी गोरखपुर:प्रसारण यात्रा के गौरवशाली चौवालिस वर्ष !


अपने पिछड़ेपन,बाढ़,अपराध और बीमारियों के लिए एक लम्बे समय तक जाना जानेवाला पूर्वी उ0प्र0का एक चर्चित शहर -गोरखपुर ।क्षेत्रफल 3483.81वर्ग कि0मी0,जनसंख्या लगभग पचास लाख,,साक्षरता 43.3प्रतिशत । राप्ती (पूर्व में अचिरावती)नदी के किनारे बसे इस शहर को आदि काल से गुरु गोरक्षनाथ की तपस्थली के रुप में जाना जाता रहा है ।चौरीचौरा और डोहरिया कला ने आजादी की लड़ाई में इसे सुर्खियां दीं ,प्रेमचंद की कर्मस्थली और रघुपति सहाय "फ़िराक गोरखपुरी "की जन्म स्थली और उनके साहित्यिक योगदान ने इसे महिमामय बनाया तो 1980के दशक में आपराधिक गैंगवार के चलते बी0बी0सी0ने इसे विश्व स्तर की ख्याति प्रदान किया।

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय ने इस शहर को अनेक भाषा भाषियों का संगम स्थल बनाया और फर्टिलाइजर और हथकरघा के कारखानों ने रोजगार और कृषि उत्पादन में वृद्धि के अनेक द्वार खोले ।गीताप्रेस से सस्ते दाम पर धार्मिक पुस्तकें और "कल्याण"पत्रिका आज भी तमाम विपरीत स्थितियों के चलते यहीं से पूरे विश्व को सुलभ है।गोरखपुर राजनीतिक तापमान पर भी चढ़ा उतरा रहा है चाहे वह उ0प्र0के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए श्री टी0एन0सिंह के चुनाव हारने के मुद्दे पर अथवा श्री वीर बहादुर सिंह के मुख्यमंत्री बनने के सुखद आश्चर्य पर ।जातिवाद से ऊपर उठकर सोचा जाय तो एक मुख्यमंत्री के रुप में स्व0 वीर बहादुर सिंह ने इस शहर को बहुत कुछ दिया है।दूरसंचार को विस्तार देने ,स्पोर्ट्स कालेज,गीडाऔर दूरदर्शन को गोरखपुर लाने का श्रेय उन्हें ही है ।वर्तमान में एम्स की स्थापना,फर्टिलाइजर के बंद पड़े कारखाने को खोलने की घोषणाऔर अपने रेलवे प्लेटफार्म की लम्बाई को लेकर Longest Platform of world के रुप में लिम्का बुक में उपस्थिति ने गोरखपुर को ऊर्जा दी है लेकिन यह शहर इंसेफेलाइटिस की महामारी का दंश अब भी झेल रहा है।

इन्हीं पृष्ठभूमि में 2अक्टूबर 1972 से गोरखपुर शहर के बीचो बीच स्थित टाउन हाल परिसर में बिना किसी औपचारिक समारोह के आबंटित स्टूडियो स्थल से तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाले आकाशवाणी केन्द्र का प्रसारण प्रारंभ हुआ ।एक सौ किलोवाट के मध्यम तरंग ट्रांसमीटर से श्री पी0एस0भगत इंस्टालेशन इंजीनियर और श्री पी0के0बंसल ए0एस0ई0 की तकनीकी देखरेख में प्रायोगिक आंशिक प्रसारण कुछ दिन पहले से ही आरंभ हो चुका था और मुझे याद है कि सुश्री संतोष धर और नवनीत मिश्र की रिकार्डेड आवाज़ टेस्टिंग के रुप में गूंजती थी ।शुरुआती दौर में स्व0आई0के0गुर्टू कार्यक्रम अनुभाग के अगुआ थे और प्रथम उदघोषणा आकाशवाणी लखनऊ से आए वरिष्ठ उदघोषक श्री अरुण श्रीवास्तव ने की थी।शुरु में तीसरी सभा की "युववाणी"एयर पर आई और फिर क्रमश:तीनों सभाओं का प्रसारण चलने लगा।मैं मूलत:गोरखपुर का हूं और उन दिनों वहीं विश्वविद्यालय में विधि का छात्र था ।अपनी साहित्यिक अभिरुचियों के चलते इस नवागत केन्द्र से जुड़ने को उत्सुक रहा करता था ।मेरा भी सपना सच हुआ और इस केन्द्र पर 1977से 2003तक मैनें प्रसारण अधिशासी और कार्यक्रम अधिकारी के रुप में कुछ अंतराल पर कई दशक अपनी सेवाएं दीं हैं।ढेर सारे प्रसंग और यादों की बारात अब भी संग साथ हैं।चाहे वह आपातकाल में लाइव स्टूडियो में घुसकर इंदिरा गांधी जिन्दाबाद नारे लगाने की कुछ युवा कांग्रेसियों की ओर सफल कोशिश का प्रसंग हो या भोजपुरी बुलेटिन शुरु करने के लिए चले धरना ,घेराव या प्रदर्शन की सिलसिलेवार कड़ी ।तीन- तीन दिनों तक बरसों इस केन्द्र पर सिलसिलेवार चले कंसर्ट तो अब मानों सपना ही हो गया है।कहां पहले कंसर्ट के कार्ड के लिए दबाब बना करता था कहां अब इक्के दुक्के हो रहे कंसर्ट में श्रोताओं-दर्शकों का टोटा पड़ जाया करता है ।वे दिन कुछ और ही थे जब अकेले राहत अली और ऊषा टंडन की जोड़ी भारत परिक्रमा करते हुए आकाशवाणी गोरखपुर का परचम लहराया करती थी ।आज भी अपने संस्कारी परंपरागत लोकगीतों(पूर्वी,दादरा,नकटा,निर्गुण,कहरवा,नगारी,धोबीउहवा,चैता,फाग,सावनी,बिरहा,बसंती दि),लोकनृत्यों (फरुवाई,धोबीउहवा,बिदेसिया,हुड़का आदि) तथा टेराकोटा हस्तशिल्पकारी से यह इलाका समृद्ध है ।किन्तु संकल्प शक्ति और सक्षम नेतृत्व के अभाव में राष्ट्रीय स्तर पर नये मानक अभी तक नही बना पा रहा है ।आकाशवाणी गोरखपुर में प्रादेशिक समाचार एकांश पहली सभा में सफलतापूर्वक प्रात: 7-20से 7-30तक बुलेटिन प्रसारित कर रहा है और शाम को भोजपुरी में भी बुलेटिन प्रसारित हो रही है।एफ0एम0पर विविध भारती का प्रसारण हो रहा है।शहर में एक प्राइवेट एजेन्सी भी एफ0एम0चैनल का प्रसारण कर रही है।

धूप छांव सरीखे अपनी विकास यात्रा पर चल रहे इस केन्द्र से अभी भी श्रोताओं की ढेर सारी उम्मीदें जुड़ी हैं।इन बूढ़ी होती आंखों ने इस केन्द्र का स्वर्णिम काल देखा है और अब प्रौढ़ावस्था में पहुंचे इस केन्द्र से अब भी कुछ चमत्कार की आशा संजोए हुए है।बहरहाल प्रसार भारती परिवार आकाशवाणी गोरखपुर को इसके चौवालिसवें स्थापना दिवस पर अपनी शुभकामनाएं दे रहा है ।

ब्लाग रिपोर्ट-प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी,पूर्व कार्यक्रम अधिकारी,आकाशवाणी,लखनऊ

1 comment:

  1. आकाशवाणी गोरखपुर को चौवालिसवें स्थापना दिवस पर ... शुभकामनाएं

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