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Saturday, November 5, 2016

नयेपन के लिए परिवर्तन ज़रुरी !


मेरा अपना ऐसा अनुभव रहा है कि आकाशवाणी दूरदर्शन महानिदेशालयों द्वारा कार्यक्रम से जुड़े लोगों के जब स्थानान्तरण होते हैं तो अन्य तथ्यों के अलावे केन्द्र को कुछ नयेपन से नवाजे जाने की अन्तर्निहित भावनाएं भी हुआ करती हैं।पिछले दिनों भी कुछ ऐसे ही परिवर्तन हुए हैं।डाक्टर सन्तोष कुमार मिश्र सहायक निदेशक कार्यक्रम ने 3नवम्बर को दूरदर्शन इलाहाबाद में कार्यक्रम प्रमुख पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है।आकाशवाणी एवं दूरदर्शन में उनका काफी लम्बा अनुभव है। डाक्टर मिश्र का कार्यक्रम एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में अच्छी जानकारी तथा पैठ है।उन्होंने पत्रकारिता से ही अपने कैरियर की शुरुआत की थी। उनके बनाए कार्यक्रम दूरदर्शन में काफी लोकप्रिय रहे।डाक्टर मिश्र को नए पदभार के लिए हार्दिक बधाई ।उम्मीद है उत्कृष्ट कार्यक्रम निर्माण की उनकी यह यात्रा जारी रहेगी।उधर वरिष्ठ पत्रकार और रंगकर्मी होने के साथ-साथ आकाशवाणी गोरखपुर के क्षेत्रीय समाचार एकांश में 29 वर्षों तक समाचार वाचन की आकस्मिक सेवाएं देते हुये डा. मुमताज खान 30अक्टूबर को 60 वर्षों के हो गये।

इस अवसर पर आकाशवाणी के क्षेत्रीय समाचार एकांश में आकस्मिक समाचार वाचक सह अनुवादक पैनल के साथियों ने उनके साठ वर्ष के होने और समाचार वाचक पैनल से सेवानिवृत्त होने के उपलक्ष्य में एक छोटा सा आयोजन रखा। सभी ने डा. मुमताज खान को भावभीनी विदाई दी। समाचार संपादक श्री आर0सी 0शुक्ल समेत आयोजन में मौजूद सभी साथियों ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा की। डा. खान ने भी सभी से अपने संस्मरण को साझा किया और कहा कि व्यक्ति जो कुछ भी पाने की ठान लेता है, उसे जरूर मिलता है।डा0मुमताज़ ने भावुक होकर बताया कि बचपन से अपने अब्बा और अम्मी के कड़े अनुशासन और सामाजिकता के घेरे में जो तरबीयत मिली उसने जिन्दगी के हर मोड़ पर ईमानदार और प्रतिबद्ध बने रहने का हौसला दिया ।इन 60 सालों में अगर समझदार होने तक की उम्र को याद करू तो शायद कुछ ठीक ठीक न बता पाऊं ।लेकिन 13-14 वर्ष की उम्र में अकेले शिमला और कश्मीर की 21-21 दिनों की यात्रा ने आत्मनिर्भर होने और अलग अलग संस्कृतियों से रूबरू होने का मौका दिया ।और यहीं से पढ़ाई के साथ साथ जिम्मेदार संस्कृतिकर्म की आधारशिला पड़ी ।रंगमंच, रेडियो, दूरदर्शन ये ऐसे साथी हैं जो मेरे सबसे ज़्यादा करीबी हैं ।इकोनोमिक्स में पी एच डी, तीन साल का बिजनेस मैनेजमेंट कोर्स और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई ने जटिलताओं का सूझबूझ के साथ उपयुक्त प्रबंधन और लोक प्रशासन के प्रति विशेष जागरूक नागरिक बनने में अहम भूमिका निभाई ।साप्ताहिक समाचार पत्र उत्तरी हेराल्ड में वरिष्ठ पत्रकार स्व जयप्रकाश शाही के सानिध्य ने और 70 के आखिरी दशक की राजनीतिक उथल पुथल ने भारतीय लोकतंत्र और आम आवाम की कठिनाईयों के प्रति संवेदनशील सोच की दिशा में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित किया ।उधर सन् 1973 में थियेटर एक्टिविटी की जो शुरूआत हुई उसने भी बिहार, हिमांचल, उत्तराखंड़, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के कई जिलों में आईना और इप्टा के माध्यम से प्रतिभाग करने और पुरस्कृत होने जैसी उपलब्धियों ने आत्मविश्वास को और सामाजिक कार्यकर्ताओ ने का साथ मिला जिन्दगी में कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित किया ।प्रो परमानंद, प्रो आर के मणि, डा बी के मुखर्जी, ए के हंगल, दीना पाठक, कैफी आज़मी, शबाना आज़मी, फिल्म निर्देशक कल्पना लाजमी, श्री सी राजगोपालन, हबीब तनवीर, प्रो एल बी वर्मा, तड़ित कुमार जैसी विभूतियो ने मुझे भीतर तक प्रभावित ही नहीं बल्कि प्रगतिशील चिन्तन के प्रति और अधिक जागरूक बनाया ।80 के दशक से लेकर अबतक की रंगमंचीय यात्रा में 7 बार इप्टा के प्रान्तीय सचिव, 2 राष्ट्रीय सम्मेलनो में सहभागिता, प्रेमचंद की 17 कहानियों का नाट्य रूपांतरण व निर्देशन, चौरीचौरा कांड का भारत में पहली बार लाईट एंड साउंड पर आधारित नाट्य प्रदर्शन, मगहर में कबीर के लोग जैसे कार्यक्रमो का संयोजन एवं प्रस्तुति हमेशा मुझे प्रेरणा देते हैं । 1 दशक से बाल अधिकार और वर्ष 2011 से अबतक 5000 बेसहारा मुसीबत में फसे बाल मज़दूरो को उनके घरो तक भेजकर जो संतोष मिल रहा है वह शब्दो में बताना मुश्किल है । 

गोरखपुर मंडल के कई जिलो में समाज, सिविल पुलिस, आर पी एफ, जी आर पी और एन जी ओ के लोगो के लिए आयोजित कार्यशालाओ में बतौर विषय विशेषज्ञ शामिल होकर बहुत कुछ सीखने को मिला है । लगभग 29 सालो से आकाशवाणी गोरखपुर से प्रादेशिक समाचार वाचक, वर्ष 2002 से पी टी आई- भाषा के संवादाता, INTACH और RED CROSS के आजीवन सदस्य के रूप में कार्य करने से संस्कृतिकर्म को गति मिली है । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गोरखपुर में खाद कारखाना और एम्स शिलान्यास कार्यकम की लाईव कमेंट्री का राष्ट्रीय प्रसारण करके मुझे जिस गौरव की अनुभूति हुई वो अविस्मरणीय है ।आज मैं सोचता हूं कि मेरा संस्कृतिकर्म इसी तरह जारी रहे ।डा0मुमताज़ को प्रसार भारती परिवार की शुभकामनाएं।

एक ऐसे ही ऊर्जावान कार्यक्रम अधिकारी डा0ए0आलम फ़ैजी ने दूरदर्शन गोरखपुर से स्थानान्तरण के बाद विगत दिनों दूरदर्शन मऊ को अपनी सेवाएं देना शुरु कर दिया है ।वे पूर्व में भी अगस्त 2004से 2012तक इस केन्द्र पर रह चुके हैं जब उन्हें कृषि दर्शन कार्यक्रम के लिए नेशनल एवार्ड से भी नवाजा जा चुका था ।मूलत:गाजीपुर के रहने वाले डा0फ़ैजी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पी0एच0डी0हासिल की थी।उनको नए पदभार की शुभकामनाएं।

ब्लाग रिपोर्ट-प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी,लखनऊ।मोबाइल नं09839229128,darshgrandpa@gmail.com

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