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Friday, December 30, 2016

सर्वेश दुबे : उड़ान अभी बाक़ी है


आकाशवाणी गोरखपुर ने प्रसारण की दुनियां को ढेर सारे नगीने दिये हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना और अपनी संस्था का नाम रौशन किया है।उनकी सेवाकालीन और उत्तर सेवाकालीन सेवाएं हमेशा सराही गई हैं।ऐसे ही समर्पित वरिष्ठ उदघोषक हैं श्री सर्वेश दुबे जो 31दिसम्बर को अपनी 42साल की दीर्घकालीन सेवा से निवृत्त होने जा रहे हैं।उनकी लोकप्रियता का आलम यह रहा है कि वे आकाशवाणी गोरखपुर के प्रतीक चिन्ह जैसे बन चुके थे।हर सरकारी ,गैर सरकारी आयोजनों में उन्हें शामिल करना आयोजकों के लिए गौरव माना जाता है।

27दिसम्बर 1956 को जन्में एक लोकप्रिय चिकित्सक और संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डा0आर0डी0दुबे के सुपुत्र सर्वेश बचपन से ही रेडियो से जुड़े रहे हैं।इलाहाबाद में शिक्षा के दौरान वहां के कुछ नामचीन उदघोषकों के सम्पर्क में आकर इन्होंने रेडियो में जाना और एक कुशल उदघोषक बनना अपना उद्देश्य बना लिया ।पिता की पोस्टिंग जब गोरखपुर हुई तो एक दिन उनका इंटरव्यू लेने एक कार्यक्रम अधिकारी स्व0के0के0शुक्ल इनके घर पहुंचे ।उन्होंने राह दिखाई और स्नातक करते करते ये ड्रामा कलाकार फिरआकस्मिक उदघोषक और आगे चलकर नियमित बन गये ।

उदघोषक के रुप में उन्होंने आकाशवाणी गोरखपुर और वाराणसी को अपनी मूल्यवान सेवाएं दी हैं।वे एक बेहतरीन मंच संचालक और नाटक कलाकार भी हैं और उसी के चलते उन्हें "बिधना तोहरे देस में","बलमा बड़ा नादान " सहित अनेक भोजपुरी फ़िल्मों में काम करने का अवसर भी मिला।बुलन्द आवाज़ के धनी सर्वेश को उच्चारण में आवश्यकतानुसार उतार चढ़ाव और शब्दों की स्पष्ट डिलेवरी में महारत हासिल है।एक बार तो एक संगीत कंसर्ट में मंच पर ही पं0जसराज ने इन्हें गले लगा लिया था ।एक बेहतर कलाकार और बेहतरीन दोस्त के रुप में वे गोरखपुर में जाने जाते हैं।वे गोरखपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी रहे हैं।सुशिक्षित और कुलीन पत्नी श्रीमती गीता दुबे उन्हें यथासंभव पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त रखती रही हैं जिससे वे अपनी बेस्ट परफार्मेंस दे सकें।

वे मां दुर्गा के भक्त हैं और आस्थावान हैं।इसीलिए भगवान ने उन्हें सब कुछ दिया है।एक पुत्र शिवांग गौतम और पुत्री शिवांगी मणि त्रिपाठी अपनी अपनी घर गृहस्थी में सुखी हैं।आकाशवाणी गोरखपुर में विभिन्न पदों पर नियुक्ति के दौरान मुझे भी सर्वेश दुबे के अंदर की प्रतिभा को तराशते रहने और प्रोत्साहित करते रहने का अवसर मिला है।उन्होंने एक आदर्श सूत्र वाक्य अपनी ज़िन्दगी में ढाल लिया था कि "ज़िन्दगी चाहे एक दिन की हो चाहे चार दिन की,उसे ऐसे जियो जैसे कि ज़िन्दगी तुम्हें नहीं मिली बल्कि ज़िन्दगी को तुम मिले हो ।"इसीलिए वे सभी के प्रिय बने हुए हैं।इन दिनों उनके रिटायरमेंट पर गोरखपुर में अनेक औपचारिक और अनौपचारिक फेयरवेल चल रहे हैं।आकाशवाणी गोरखपुर में कार्यालय अध्यक्ष केन्द्र अभियन्ता श्री ए0के0शर्मा के नेतृत्व में उनकी सेवाओं को सराहते हुए गत 23दिसम्बर को उन्हें सम्मानित किया गया ।संगीतज्ञ प्रोफेसर शरद मणि त्रिपाठी ने उनके बारे में ठीक ही कहा है कि "सर्वेश दुबे अर्थात भद्र लोक की वज़नी आवाज़ के एक और जादूगर।"


प्रसार भारती परिवार ऐसे समर्पित कलाकार की सेवाओं की प्रशंसा करते हुए उनके जीवन की अगली पारी के लिए अपनी शुभकामनाएं देता है।

ब्लाग के पाठक भी उन्हें अपनी भावनाओं से उनके मोबाइल नं0 07080606356और09415211301 पर अवगत भी करा सकते हैं।

ब्लाग रिपोर्ट - प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, पूर्व कार्यक्रम अधिकारी,आकाशवाणी, लखनऊ

मोबाइल नं09839229128ईमेलdarshgrandpa@gmail.com

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