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Saturday, April 1, 2017

अस्सी साल का हो रहा है आकाशवाणी लखनऊ !



अपनी सुनहरी यादों को संजोये हुए आकाशवाणी लखनऊ अपनी स्थापना की उन्यासवीं वर्षगांठ 2अप्रैल को मनाने जा रहा है।इस केन्द्र से प्रसारण का कार्य 2अप्रैल1938 को प्रारम्भ हुआ था।उन दिनों ब्रिटिश हुकूमत वाले इस सूबे को युनाइटेड प्राविंसेज आफ़ आगरा एंड अवध कहा जाता था ।

हुसैनगंज चौराहे से लालकुंआ की ओर जाने वाली सड़क एबट रोड स्थित दो मंजिला किराये के एक मकान से पं0गोविन्द वल्लभ पंत के हाथों इसकी शुरुआत हुई थी।उस समय निदेशक श्री ए0आडवाणी,श्री एच0आर0लूथरा प्रमुख कार्यक्रम अधिकारी और मुख्य अभियंता श्री ए0व्यंकटेश्वर थे।इस अवसर पर गीत संगीत का आयोजन भी हुआ था और महाराष्ट्र की सुरीली गायिका वत्सलबाई कुमठेकर उसकी प्रमुख गायिका थीं।सन 1940 के आसपास राजा विजय कुमार त्रिपाठी की 18विधान सभा मार्ग स्थित कोठी और परिसर को दो सौ रुपये महीने के किराये पर ले लिया गया और फिर वहीं से प्रसारण चलने लगा ।आगे चलकर यह किराया चार सौ महीना हुआ और बाद में इसे भारत सरकार ने ख़रीद ही लिया ।परिसर के पृष्ठभाग में नवनिर्मित स्टूडियो को छोड़कर मध्य और आमुख तीन मंजिला भवन उस पुरानी कोठी की अब भी याद दिला रहे हैं।

हां,बताते चलें कि पर्दानशीन मोहतरमा सईदा बानो केन्द्र की पहली उदघोषिका थीं।यह भी अजीब इत्तेफ़ाक है कि शुरुआती दौर के इस केन्द्र पर जब वार्ताकार,कलाकार और कर्मचारीगण पैदल,रिक्शे,इक्के,सायकिल,मोटर सायकिल, स्कूटर या गाड़ी से आते रहे वे अब केन्द्र की उम्र के इस पड़ाव पर मेट्रो से आने की तैय्यारी में हैं।इस केन्द्र से ढेर सारे शानदार,गुणी और नामवर लोगों का गहरा नाता रहा है।जैसे-उस्ताद बिस्मिल्लाह खां,उस्ताद अली अकबर ख़ां,विदुषी बेग़म अख़्तर,संगीतकार मदन मोहन,प्रेम चन्द,पं0सूर्यकांत त्रिपाठी निराला,भगवती चरण वर्मा,अमृत लाल नागर,इलाचन्द्र जोशी,चन्द्रभूषण त्रिवेदी रमई काका,शौकत थानवी,इशरत रहमानी,पं0बाल कृष्ण शर्मा नवीन,सुश्री सिद्धेश्वरी देवी,उस्ताद निसार हुसैन,पं0वी0जी0जोग,मैथिली शरण गुप्त,पं0मल्लिकार्जुन मंसूर,फ़िराक़ गोरखपुरी,सुमित्रा नन्दन पंत,पं0श्रीकृष्ण नारायण रातजनकर,कुमार गंधर्व,पं0विद्यानिवास मिश्र,देवकी नन्दन पांडेय,यशपाल,तलत महमूद,नौशाद,बलभद्र दीक्षित पढ़ीस,जोश मलीहाबादी,जिगर मुरादाबादी,असर लखनवी,मजाज़,शकील बदायूनीं,आचार्य नरेन्द्र देव,डा0सम्पूर्णानन्द,संगीतकार मुरली मनोहर,अनुपम खेर,के0पी0सक्सेना,आले हसन,कैलाश बुधवार,के0के0सिंह,प्रसारण जगत के पुरोधा जनाब के0के0नैय्यर,मुख्तार अहमद,यज्ञदेव पंडित,रज्जन लाल,नवनीत मिश्र,सुमित्रा कुमारी सिन्हा,विनोद चैटर्जी,राहत अली,जी0एम0शाह,इक़बाल मजीद,कुमुद नागर,जयदेव शर्मा कमल,मुजद्दिद नियाज़ी,सुशीला मिश्रा,शांति हीरानन्द,गिरीश नारायण चतुर्वेदी आदि ।पूर्व समाचार वाचक श्री नवनीत मिश्र के शब्दों में-"पुरानी आवाज़ों को फिर से सुनने की कोई वैज्ञानिक विधि अगर ईजाद की जा सके तो आकाशवाणी लखनऊ के स्टूडियो में आज भी पं0डी0बी0पलुस्कर,पं0ओंकार नाथ ठाकुर,उस्ताद अलाउद्दीन खां,उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ांउस्ताद बड़े गुलाम अली खां,उस्ताद मुश्ताक़ हुसैन,उस्ताद निसार हुसैन,रसूलन बाई,काशी बाई,गंगू बाई हंगल,बिंदादीन महाराज,बिरजू महाराज,पं0भीमसेन जोशी,पं0रविशंकर, आदि मूर्धन्य कलाकारों की उपस्थिति महसूस की जा सकती है।

वर्ष 2013 में इस केन्द्र के 75वें स्थापना वर्ष पर तत्कालीन अपर महानिदेशक श्री गुलाब चन्द जी ने "हीराकण" नाम से स्मृतियों को सहेजते छायाचित्र और अभिलेखों का अद्वितीय संग्रह प्रकाशित करवाया था ।ब्लाग लेखक को भी इस केन्द्र से वर्ष 2003 से 2013तक लगभग एक दशक तक जुड़कर गोमती नदी की शुचिता पर केन्द्रित धारावाहिक "गोमती,तुम बहती रहना","गुलदस्ता ए लखनऊ"और बेगम अख़्तर पर केन्द्रित धारावाहिक "कुछ नक्श तेरी याद के" जैसे अनेक उत्कृष्ट कार्यक्रमों से अलंकृत करने का सौभाग्य मिला है।

आकाशवाणी लखनऊ अपने जिन कुछ विशेष कार्यक्रमों के लिए विश्व स्तर पर अब भी प्रसिद्ध है वह है -शाम ए ग़रीबां।इसकी जीवंतता का आलम यह है कि बड़े इमामबाड़े में काले लिबास में मातम करने वालों के बीच मिम्बरे रसूल पर बैठे ज़ाकिर जब करबला की लड़ाई का वाक्या बयान करते हैं तो वहां हाल के घुप अंधेरे में बैठे लोगों के अलावा सात समुन्दर पार रेडियो पर सुन रहे लोग सिसक सिसक कर अब भी रो पड़ते हैं।लगभग दो दशक तक लाइव चलने वाले इस प्रसारण की ज़िम्मेदारी जनाब तस्वीरूल हसन आबिदी उठाते रहे ।अब इसे रिकार्ड करके सुनवाया जाने लगा है।2अक्टूबर 1963से विविध भारती सेवा का प्रसारण और उससे भी पहले 15अप्रैल 1953 से प्रादेशिक समाचारों का प्रसारण शुरू हुआ था जो आज भी चल रहा है।इसी तरह 20अगस्त 2000 से यहां से एफ0एम0रेनबो का प्रसारण प्रारंभ हुआ है जो प्राइवेट चैनेलों की तमाम प्रतिस्पर्धाओं के बावज़ूद लोकप्रियता के पायदान पर अब भी अव्वल बना हुआ है।वर्ष 2002 से प्रशासनिक कामों के त्वरित निवारण हेतु इसी परिसर में आकाशवाणी महानिदेशालय के उप महानिदेशक/अपर महानिदेशक का कार्यालय भी काम कर रहा है।केन्द्र निदेशक श्री पृथ्वीराज चौहान की अगुआई में केन्द्र अपनी स्थापना दिवस के अवसर पर एफ0एम0और प्राइमरी चैनल पर अनेक विशेष कार्यक्रम प्रसारित कर रहा है।

प्रसार भारती परिवार आकाशवाणी लखनऊ को उसके स्थापना दिवस पर और उसकी इस शानदार यात्रा पर उसे बधाई देता है।

ब्लाग रिपोर्ट-प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी,पूर्व कार्यक्रम अधिकारी,आकाशवाणी,लखनऊ।मोबाइल न09839229128ईमेलdarshgrandpa@gmail.com

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