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Tuesday, July 18, 2017

फ़रमाइशों का हिलोर : आकाशवाणी सागर में !

आकाशवाणी सागर:जहां अब भी फ़रमायशी लहरें हिलोर मारती हैं !
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आकाशवाणी ने पिछले दिनों अपनी स्थापना के कीर्तिमानक 80 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 8 जून 1936 के दिन इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस, ऑल इंडिया रेडियो के नाम से प्रचलित हुआ, तब से यह प्रसारण के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज भी लोगों के दिलों को यह छूती है। आकाशवाणी में प्रसारित होने वाले कार्यक्रम "हैलो फरमाइश "का रेडियो श्रोता ब्रेसब्री से इंतजार करते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आकाशवाणी के सागर केन्द्र पर रोजाना 150 से ज्यादा श्रोता अपनी चिट्ठियां लेकर अब भी पहुंचते हैं।
1993 से शुरू हुआ था सफर
सागर आकाशवाणी क्रेंद्र की स्थापना 2 मई सन् 1993 में हुई थी। 23 साल के इस सफर से श्रोता लगातार जुड़े हैं। उदघोषक जयशेखर ने बताते हैं कि श्रोता चाहते हैं कि हम उनसे लगातार बातें करें। ऐसे कई लोग आते हैं जो बताते हैं कि गानों के बीच आपकी बातें सुनना और करना हमें बहुत पसंद हैं।
लोकगीत सुनकर होते हैं उत्साहित
सोमवार को "फोन करें गीत सुने "और मंगलवार को "फोन करें लोकगीत सुने "कार्यक्रम प्रसारित होता है। दोनों की कार्यक्रम को बुंदेलखण्ड के लोग अधिक पसंद करते हैं। इसके साथ ही गुरुवार को प्रसारित होने वाला कार्यक्रम "हैलो किसान की वाणी "को भी खूब पसंद किया जा रहा है। इस प्रोग्राम में एक्सपर्ट द्वारा किसानों को खेती करने के टिप्स देते हैं।
फोन हमेशा रहता है इंगेज
आकाशवाणी उद्घोषक श्री जयशेखर आगे बताते हैं कि सालों बाद भी श्रोताओं का भरपूर प्यार हमें अब भी मिल रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है फरमाइश के लिए हमारे पास अभी भी रोजाना सैकड़ों चिट्ठियां तो आती ही हैं और फोन भी इंगेज रहता है। फोन इन कार्यक्रम को श्रोता ज्यादा पसंद कर रहे हैं। म.प्र . के अलावा यू.पी .के ललितपुर से भी फोन हमें मिलते हैं। रायसेन, जबलपुर, खुरई, दमोह, बीना सहित आस-पास के सभी इलाकों से हमारे लिए फोन आते हैं।
80 वर्ष हुए पूरे
आकाशवाणी को 1956 में "आकाशवाणी "का नाम दिया गया। ऑल इंडिया रेडियो के अलावा सामान्य रूप में भी भारत में रेडियो का विकास हो रहा है। सरकार की उदार नीति के कारण रेडियो स्टेशनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। पूरे देश में इस समय 250 से अधिक निजी रेडियो स्टेशन है जिन्हें लगभग 50 प्रसारणकर्ताओं द्वारा चलाया जा रहा है। लगभग 200 सामुदायिक रेडियो स्टेशन भी देशभर में चल रहे हैं। सरकार ने लाइसंस नियमों में छुट दी है ताकि इसको प्रोत्साहन मिल सके।
इनपुट:- पत्रिका से साभार।
ब्लाग रिपोर्टर :-  श्री. प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी,लखनऊ।मोबाइल9839229128

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