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Wednesday, May 2, 2018

Inspiration - विक्की रॉय; कूड़ा उठाने से करोड़पति तक ।

                               
विक्की रॉय एक गरीब परिवार से आये थे . उसके अलावा, उसकी तीन बहने और भाई थे. उसे बचपन से ही अन्य बच्चों के साथ खेलने की अनुमति नहीं थी, और जब उसके माता-पिता काम की तलाश में चले गए, तो उसे उसके नाना नानी के साथ छोड़ दिया गया।

1999 में, जब वह 11 वर्ष के थे,  उन्होंने अपने चाचा की जेब से 900 रूपये चुराए और घर से भागकर दिल्ली आ गए । स्टेशन पर कुछ बच्चों ने उसे रोते हुए देखा, और उन्हें सलाम बलाक ट्रस्ट (एसबीटी) में ले गये ।

लेकिन ट्रस्ट हमेशा अंदर से बंद रहता था इसलिए एक सुबह  वह दूसरी बार भाग गए ,उसने रेलवे स्टेशन के  बाकि बच्चो के साथ कूड़ा उठाने का काम शुरू कर दिया . लेकिन कुछ समय बाद रॉय  ये काम छोड़कर वे  एक रेस्तरां में बर्तन धोने का काम करने लगे ।

वह एक केंद्र में शामिल हो गए, जिसका नाम ‘अपना घर’  था. विक्की रॉय को स्कूल में 6 th क्लास में दाखिला दिया गया .रॉय ने 10 वीं बोर्ड की परीक्षा में 48 फीसदी प्राप्त किये । उन्हें National Institute of Open Schooling में शामिल होने के लिए कहा गया , जहां वह कंप्यूटर या टीवी रिपेयर करने का प्रशिक्षण ले सकता था। फोटोग्राफी के साथ उनका मन यही से आया, जब ट्रस्ट के दो बच्चे फोटोग्राफी में प्रशिक्षण के बाद इंडोनेशिया और श्रीलंका गए । यह देखकर विक्की रॉय के मन में भी लालच आ गया और उसने अपने अध्यापक को कहा की वह भी फोटोग्राफी सीखना चाहते है।

रॉय को पता भी नहीं था कि यह कहकर उसका जीवन हमेशा के लिए बदलने वाला है . उस समय एक ब्रिटिश फिल्म निर्माता डिक्सी बेंजामिन ट्रस्ट में documentary बनाने आये थे. तभी अध्यापक ने रॉय की मुलाकात बेंजामिन से करवाई । इस तरह विक्की रॉय बेंजामिन के सहायक बन गए, और एक फोटोग्राफर के रूप में अपनी यात्रा शुरू की । बेंजामिन ने उसे SLR का उपयोग करना सिखाया ।

 उन्हें सलाम बलाक ट्रस्ट छोड़ना  पड़ा क्योकि उसमे केवल 18 साल से छोटे बच्चे ही रह सकते थे. ट्रस्ट केवल एक गैस सिलेंडर, स्टोव, मैट्रेस और बर्तन जैसी मूलभूत चीजे प्रदान करेगा। लेकिन वह ट्रस्ट के आलावा किसी ओर को नहीं जानता था। हालांकि, स्वतंत्र रहना रॉय के लिए एक आशीर्वाद साबित हुआ क्योकि रॉय ने असिस्टेंट बनने लिए प्रसिद्ध फोटोग्राफर अनय मान से संपर्क किया. उन्होंने सहमति व्यक्त की, लेकिन एक शर्त रखी की रॉय को कम से कम तीन साल तक उसके साथ काम करना होगा।

अनय मान एक अच्छे शिक्षक साबित हुए। उसने रॉय को फोटोग्राफी सिखाने के लिए ड्राइंग का इस्तेमाल किया और प्रकाश और क्षेत्र की गहराई जैसे कॉन्सेप्ट्स से रूबरू करवाया । यह कार्य रॉय को कई जगहों पर ले गया. उनका जीवन कई बार अब शानदार होटल में बीतता था।

 रॉय ने लंदन और दक्षिण अफ्रीका में भी प्रदर्शनी/exhibition किया जो काफी सफल रहा. यह वह समय था जब रॉय को लगने लगा की वह भी एक बड़ा फोटोग्राफर है ।

‘स्ट्रीट ड्रीम्स’ की सफलता के बाद रॉय नई परियोजनाओं को लेकर आश्वस्त था। 2008 में, मेबा फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक वैश्विक प्रतियोगिता में भाग लिया जिसमे 5000 लोग ने हिस्सा लिया था . इसमें जितने वाले को अमेरिका जाकर छह महीने के लिए विश्व व्यापार केंद्र (डब्ल्यूटीसी) की फोटोग्राफ़ी करने का मोका दिया जाना था. रॉय जितने वाले तीन फोटोग्राफरों में से एक था। । उनका काम डब्ल्यूटीसी 7 में प्रदर्शित हुआ, और उन्हें ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग अवार्ड से नवाज़ा गया. रॉय को बकिंघम पैलेस में प्रिंस एडवर्ड के साथ दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया गया। यह पहली बार था जब उसने महल के बारे में सुना था। रॉय का काम कई जगहों पर जाना शुरू हुआ: जैसे व्हाइटचापल गैलरी और फ़ोटोमुस्म स्विटज़रलैंड ।

सोर्स और क्रेडीट :http://whatsknowledge.com/real-life-motivational-story.

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