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Monday, September 30, 2019

आकाशवाणी मुम्बई में हिंदी पखवाड़ा पुरस्कार वितरण समारोह-चित्रात्मक झलकियाॅं


आकाशवाणी महानिदेशक महोदय


श्री एफ.शहरयार की अध्यक्षता एवं फिल्म अभिनेत्री सुश्री सोनाली कुलकर्णी के मुख्य आतिथ्य में आज आकाशवाणी मुम्बई में हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए । स्वागत भाषण श्री नीरज अग्रवाल अपर महानिदेशक कार्यक्रम द्वारा किया गया, कार्यक्रम का संचालन श्री जी. श्याम ने एवं आभार सुश्री अंजू धामी प्रभारी हिन्दी एकांश द्वारा किया गया । इस अवसर की कुछ चित्रात्मक झलकिया -

































चित्र योगदान - श्रीमती मनीषा निकाले
Blog Report-Praveen Nagdive, BH AIR Mumbai

आकाशवाणी भोपाल में हिंदी राजभाषा मास/ हिंदी पखवाड़ा समापन व पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन

27 सितंबर 2019 को,आकाशवाणी भोपाल राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा, विज्ञापन प्रसारण सेवा ,अतिरिक्त महानिदेशक कार्यालय मध्य क्षेत्र 2,अकाशवाणी,भोपाल  तथा सिविल निर्माण स्कंध कार्यालय,आकाशवाणी भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में राजभाषा हिंदी मास/ हिंदी पखवाड़ा समापन व पुरस्कार  वितरण समारोह का आयोजन किया गया ।
समारोह के मुख्य अतिथि थे,हिंदी के जाने-माने लेखक, चिंतक,विचारक और लोक संस्कृति/लोककला मर्मज्ञ तथा आदिवासी लोक कला अकादमी,मध्य्प्रदेश के पूर्व निदेशक डॉ कपिल तिवारी । समारोह की अध्यक्षता आकाशवाणी भोपाल के केंद्राध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र श्रीवास्तव ने की,कार्यक्रम में आकाशवाणी भोपाल के कार्यक्रम प्रमुख श्री विश्ववास् केलकर भी विशेष रूप  से उपस्थित थे ।  
समारोह के आरंभ में मुख्य अतिथि अध्यक्ष विशेष अतिथि ने, मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । तत्पश्चात आकाशवाणी भोपाल के, पूर्व सहायक निदेशक व समन्वयक राजभाषा श्री राजीव श्रीवास्तव ने समारोह का संचालन करते हुए, आयोजन की रुपरेखा पर प्रकाश डाला । मुख्य अतिथि के परिचय के बाद  केंद्राध्यक्ष व कार्यक्रम प्रमुख महोदय द्वारा,मुख्य अतिथि को पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया ।
इसके पश्चात कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अनामिका चक्रवर्ती ने, मुख्य अतिथि द्वारा साहित्य,संस्कृति लोककलाओं और लोकसंस्कृति के क्षेत्र में किये  अवदान पर विस्तृत प्रकाश डाला ।समारोह में मुख्य अतिथि केंद्राध्यक्ष और कार्यक्रम प्रमुख महोदय द्वारा,हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत होने वाले अधिकारियों और कार्मिकों को नक़द पुरस्कार व  प्रमाण पत्र प्रदान किए गए ।
समारोह में मुख्य अतिथि ने अपने आशीर्वचन में कहा कि, आप जितनी दूर तक भारत  को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करेंगे,उतनी ही तेज़ी से भारत की चेतना स्वतंत्र होगी और वह अपनी तरफ देखना शुरू करेगी । आपने आगे कहा कि, हमारे भीतर 200 वर्षों से भी अधिक समय से एक,ऐसी आत्मग्लानि भर दी गई है कि हम,अपनी आंखों से,अपना देश देखना,शुरू नहीं कर पाए हैं । मैं भी उन्हीं लोगों में से हूं, उसी शिक्षा का उत्पाद हूं ,उन्हीं विश्वविद्यालयों में पढ़ा हूं ।  लेकिन सच यह है कि, मैं जब नौकरी में आया, तो मेरे हिस्से में एक ऐसा काम आ गया ,जिसकी न तो मैंने पढ़ाई की थी, न  ही शिक्षा में, मुझे इसके बारे में कुछ बताया गया था ।  मैं बताना चाहता हूं कि,सरकारी नौकरी में आने के बाद, मुझे आदिवासी लोक कला अकादमी का, ज़िम्मा सौंपा गया, जो न तो मेरी शिक्षा से जुड़ा था और न ही कभी इसके बारे में मैंने कुछ पढ़ा था । लेकिन  30- 35 वर्षों तक, इस क्षेत्र से जुड़े रहकर काम करने के बाद ,मैंने एक नया समाज, एक नई चेतना ,एक नयी संस्कृति, एक नई सभ्यता को देखा और बहुत अचंभित हुआ कि, आख़िर शिक्षा ने, इतना बड़ा सच मुझसे छिपाया,तो क्यूं छिपाया । क्या इसे जानने का अधिकार हम सबको नहीं है  । आपने महात्मा  गांधी को  उद्धृत करते हुए कहा कि ,जब गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लिया, तब एक शिक्षित व्यक्ति ने ,थोड़ी नाराज़गी के साथ जाकर उनसे पूछा , बापू आपने यह  आंदोलन क्यों वापस लिया और यह देश कब स्वतंत्र होगा । गांधी जी ने उसकी बात को समझते हुए,बहुत सहज भाव से कहा, मित्र भारत तो कब का स्वतंत्र है और भारत में जो लोग बसते हैं ,उनकी अपनी भाषा है, अपनी बोली है, अपनी  परंपराएं हैं ,अपनी लोक संस्कृति है, वे अपने देवताओं की पूजा, अपनी  तरह के ,अनुष्ठानों से  करते हैं । अपनी तरह से उनकी आराधना करते हैं ,अपनी भाषा बोलते हैं और अपने रीति-रिवाजों व परंपराओं को मानते हैं । वे कब के स्वतंत्र हैं ।  स्वतंत्र होने की ज़रूरत तुम्हें और तुम जैसे लोगों को  है,क्योंकि जिस दिन, तुम खुद को स्वतंत्र कर लोगो ,उस दिन अपनी आँखों से तुम अपना स्वतंत्र भारत देख सकोगे । उसने बापू से फिर पूछा, बापू इसका क्या अर्थ है,गांधी जी ने कहा,मेरे कहने का आशय यही है कि, आज आपके, पास न अपनी भाषा है,न शिक्षा है,न न्याय है और न ही प्रशासन है तो आप स्वतंत्र कैसे हुए । आपको ख़ुद  को और इस देश को अपनी आँखों से देखना होगा । तभी  आप अपनी शिक्षा,भाषा,न्याय और प्रशासन की दृष्टि से,स्वयं को स्वतंत्र कह  सकेंगे । डॉ. तिवारी अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि अमेरिका के एक भाषाविद्,चाम्स्की ने कहा था कि, दुनियां में हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जिसने संवाद से विचार,विचार से पत्रकारिता,पत्रकारिता से गद्य और कविता की भाषा का सफर, एक सदी में,बहुत तेज़ी से पूरा किया,ऐसा उदाहरण पूरी दुनियां में कहीं नहीं है । लेकिन इतिहास में पहली बार,ऐसा देखने मिला कि,हिंदी भाषी व्यक्ति, अपनी भाषा को लेकर,  दीनता का शिकार है और न जाने क्यूँ शोक मनाता रहता है,उसे हिंदी की शक्ति का भान ही नहीं,वह उसकी उपलब्धियों से परिचित नहीं । अपनी बात को समाप्त करते हुए  डॉक्टर तिवारी ने कहा कि,स्वतंत्रता आंदोलन में जो चेतना, हिंदी में दिखाई दी थी ,आज फिर उसी मानसिक चेतना को,फिर से जागृत करने का ज़रूरत  है । भले ही हम  यह कहते रहें कि, हम हिंदी हैं ,हम मराठी हैं, हम गुजराती हैं, हम बंगाली हैं,  हम मलयाली हैं, हम तेलुगु हैं ,लेकिन  हमें  हिंदी की इस शक्ति को स्वीकार करते हुए, आपस में बैठकर विमर्श करना होगा और निष्कर्ष निकालना होगा कि,संवाद की भाषा,हिंदी कैसे बने । हम तय करें कि,हिंदी ही एक ऐसी शक्ति रखती है, जो समर्थ भाषा के रूप में ,पूरे देश को  एकता के सूत्र में जोड़  सकती है । 
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में, केंद्राध्यक्ष श्री धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि ,महात्मा गांधी ने कहा था कि " मैं नहीं चाहता कि, मेरा मकान चारों ओर दीवारों से घिरा रहे और उसकी खिड़कियां बंद हों, मैं चाहता हूं कि सभी देशों की संस्कृति,उन्मुक्त होकर मेरे देश में बहे ,लेकिन मैं  यह नहीं चाहूंगा कि ,इनमें से कोई मेरे पांव उखाड़ दे" श्री श्रीवास्तव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, महात्मा गांधी,जवाहरलाल नेहरू से अच्छी अंग्रेज़ी  जानते थे । जब वे विदेश से लौटकर आए, तो पूरे देश का दौरा उन्होंने किया और यह समझने का प्रयास किया कि, देश को उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक, कौन सी भाषा एक सूत्र में बांध  सकती है और उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि,हिंदुस्तान में हिंदी ही एकमात्र ऐसी समर्थ भाषा है ,जो पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ सकती है। इसीलिए  बापू ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में इस्तेमाल कर ,स्वतंत्रता का इतना बड़ा आंदोलन खड़ा किया और भारत को स्वतंत्रता दिलायी ।अपनी वाणी को विराम देते हुए केंद्राध्यक्ष ने कहा कि,जैसा मुख्य अतिथि ने अभी कहा कि,दुनियां के सबसे  बड़े माने जाने वाले,भाषाविज्ञानी ने यह कहा कि, एक सदी में संवाद की भाषा से काव्यार्थ की भाषा बनी, हिंदी में जो शक्ति है,वह किसी ओर भाषा में उन्हें नहीं दिखती इस बात पर हम सबको गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है और हम सबका यह दायित्व बढ़ जाता है कि, हिंदी को,हम आगे बढ़ाएं और केंद्र सरकार की राजभाषा के रूप में हिंदी के कार्यान्वयन में अपने सार्थक प्रयासों को और गति दें,ताकि हिंदी को उसका उचित स्थान मिल सके और हम गौरव का अनुभव कर सकें । 
इसके पूर्व आकाशवाणी भोपाल के  कार्यक्रम प्रमुख श्री विश्वास केलकर नेकहा कि,इसमें कोई दो राय नहीं कि,हिंदी ही एकमात्र संपर्क भाषा के रूप में श्रेयस्कर भाषा है जो भारत में अपना  स्थान बना सकती है, लेकिन जिस तरह से अंग्रेजी को रोजगार से जोड़ा गया है, उसी तरह से हिंदी को भी रोजगार से जोड़ना जरूरी है।  आपने आगे कहा कि,जब हिंदी में रोजगार मिलने की संभाबनाएं बढ़ेंगी,तो निश्चित ही हिंदी,स्वतः तीव्र गति से, आगे बढ़ेगी । आपने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि,भारत में हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो संपर्क भाषा के रूप में, पूरे देश को एकजुट कर सकती है। अतः  हम सब का यह दायित्व है कि,हम हिंदी को राजकाज की भाषा अर्थात राजभाषा के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास करें ।
    कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अधिकारी श्री सत्येंद्र पाल सिंह ने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष ,विशेष अतिथि और कार्यक्रम में उपस्थित समस्त अधिकारियों व कार्मिकों के प्रति आभार व्यक्त किया ।
     हिंदी राजभाषा मास/हिंदी पखवाड़े का आयोजन  वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी/प्रभारी राजभाषा अधिकारी श्री राजेश वंजानी के निदेशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ ।आकाशवाणी भोपाल में हिंदी राजभाषा मास/ हिंदी पखवाड़ा समापन व पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन कल 27 सितंबर 2019 को,आकाशवाणी भोपाल राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा, विज्ञापन प्रसारण सेवा ,अतिरिक्त महानिदेशक कार्यालय मध्य क्षेत्र 2,अकाशवाणी,भोपाल  तथा सिविल निर्माण स्कंध कार्यालय,आकाशवाणी भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में राजभाषा हिंदी मास/ हिंदी पखवाड़ा समापन व पुरस्कार पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया ।
      समारोह के मुख्य अतिथि थे,हिंदी के जाने-माने लेखक, चिंतक,विचारक और लोक संस्कृति/लोककला मर्मज्ञ तथा आदिवासी लोक कला अकादमी,मध्य्प्रदेश के पूर्व निदेशक डॉ कपिल तिवारी । समारोह की अध्यक्षता आकाशवाणी भोपाल के केंद्राध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र श्रीवास्तव ने की,कार्यक्रम में आकाशवाणी भोपाल के कार्यक्रम प्रमुख श्री विश्ववास् केलकर भी विशेष रूप  से उपस्थित थे ।  
      समारोह के आरंभ में मुख्य अतिथि अध्यक्ष विशेष अतिथि ने, मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । तत्पश्चात आकाशवाणी भोपाल के, पूर्व सहायक निदेशक व समन्वयक राजभाषा श्री राजीव श्रीवास्तव ने समारोह का संचालन करते हुए, आयोजन की रुपरेखा पर प्रकाश डाला । मुख्य अतिथि के परिचय के बाद  केंद्राध्यक्ष व कार्यक्रम प्रमुख महोदय द्वारा,मुख्य अतिथि को पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया ।
      इसके पश्चात कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अनामिका चक्रवर्ती ने, मुख्य अतिथि द्वारा साहित्य,संस्कृति लोककलाओं और लोकसंस्कृति के क्षेत्र में किये  अवदान पर विस्तृत प्रकाश डाला ।
       समारोह में मुख्य अतिथि केंद्राध्यक्ष और कार्यक्रम प्रमुख महोदय द्वारा,हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत होने वाले अधिकारियों और कार्मिकों को नक़द पुरस्कार व  प्रमाण पत्र प्रदान किए गए ।
      समारोह में मुख्य अतिथि ने अपने आशीर्वचन में कहा कि, आप जितनी दूर तक भारत  को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करेंगे,उतनी ही तेज़ी से भारत की चेतना स्वतंत्र होगी और वह अपनी तरफ देखना शुरू करेगी । आपने आगे कहा कि, हमारे भीतर 200 वर्षों से भी अधिक समय से एक,ऐसी आत्मग्लानि भर दी गई है कि हम,अपनी आंखों से,अपना देश देखना,शुरू नहीं कर पाए हैं । मैं भी उन्हीं लोगों में से हूं, उसी शिक्षा का उत्पाद हूं ,उन्हीं विश्वविद्यालयों में पढ़ा हूं ।  लेकिन सच यह है कि, मैं जब नौकरी में आया, तो मेरे हिस्से में एक ऐसा काम आ गया ,जिसकी न तो मैंने पढ़ाई की थी, न  ही शिक्षा में, मुझे इसके बारे में कुछ बताया गया था ।  मैं बताना चाहता हूं कि,सरकारी नौकरी में आने के बाद, मुझे आदिवासी लोक कला अकादमी का, ज़िम्मा सौंपा गया, जो न तो मेरी शिक्षा से जुड़ा था और न ही कभी इसके बारे में मैंने कुछ पढ़ा था । लेकिन  30- 35 वर्षों तक, इस क्षेत्र से जुड़े रहकर काम करने के बाद ,मैंने एक नया समाज, एक नई चेतना ,एक नयी संस्कृति, एक नई सभ्यता को देखा और बहुत अचंभित हुआ कि, आख़िर शिक्षा ने, इतना बड़ा सच मुझसे छिपाया,तो क्यूं छिपाया । क्या इसे जानने का अधिकार हम सबको नहीं है  । आपने महात्मा  गांधी को  उद्धृत करते हुए कहा कि ,जब गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लिया, तब एक शिक्षित व्यक्ति ने ,थोड़ी नाराज़गी के साथ जाकर उनसे पूछा , बापू आपने यह  आंदोलन क्यों वापस लिया और यह देश कब स्वतंत्र होगा । गांधी जी ने उसकी बात को समझते हुए,बहुत सहज भाव से कहा, मित्र भारत तो कब का स्वतंत्र है और भारत में जो लोग बसते हैं ,उनकी अपनी भाषा है, अपनी बोली है, अपनी  परंपराएं हैं ,अपनी लोक संस्कृति है, वे अपने देवताओं की पूजा, अपनी  तरह के ,अनुष्ठानों से  करते हैं । अपनी तरह से उनकी आराधना करते हैं ,अपनी भाषा बोलते हैं और अपने रीति-रिवाजों व परंपराओं को मानते हैं । वे कब के स्वतंत्र हैं ।  स्वतंत्र होने की ज़रूरत तुम्हें और तुम जैसे लोगों को  है,क्योंकि जिस दिन, तुम खुद को स्वतंत्र कर लोगो ,उस दिन अपनी आँखों से तुम अपना स्वतंत्र भारत देख सकोगे । उसने बापू से फिर पूछा, बापू इसका क्या अर्थ है,गांधी जी ने कहा,मेरे कहने का आशय यही है कि, आज आपके, पास न अपनी भाषा है,न शिक्षा है,न न्याय है और न ही प्रशासन है तो आप स्वतंत्र कैसे हुए । आपको ख़ुद  को और इस देश को अपनी आँखों से देखना होगा । तभी  आप अपनी शिक्षा,भाषा,न्याय और प्रशासन की दृष्टि से,स्वयं को स्वतंत्र कह  सकेंगे । डॉ. तिवारी अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि अमेरिका के एक भाषाविद्,चाम्स्की ने कहा था कि, दुनियां में हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जिसने संवाद से विचार,विचार से पत्रकारिता,पत्रकारिता से गद्य और कविता की भाषा का सफर, एक सदी में,बहुत तेज़ी से पूरा किया,ऐसा उदाहरण पूरी दुनियां में कहीं नहीं है । लेकिन इतिहास में पहली बार,ऐसा देखने मिला कि,हिंदी भाषी व्यक्ति, अपनी भाषा को लेकर,  दीनता का शिकार है और न जाने क्यूँ शोक मनाता रहता है,उसे हिंदी की शक्ति का भान ही नहीं,वह उसकी उपलब्धियों से परिचित नहीं । अपनी बात को समाप्त करते हुए  डॉक्टर तिवारी ने कहा कि,स्वतंत्रता आंदोलन में जो चेतना, हिंदी में दिखाई दी थी ,आज फिर उसी मानसिक चेतना को,फिर से जागृत करने का ज़रूरत  है । भले ही हम  यह कहते रहें कि, हम हिंदी हैं ,हम मराठी हैं, हम गुजराती हैं, हम बंगाली हैं,  हम मलयाली हैं, हम तेलुगु हैं ,लेकिन  हमें  हिंदी की इस शक्ति को स्वीकार करते हुए, आपस में बैठकर विमर्श करना होगा और निष्कर्ष निकालना होगा कि,संवाद की भाषा,हिंदी कैसे बने । हम तय करें कि,हिंदी ही एक ऐसी शक्ति रखती है, जो समर्थ भाषा के रूप में ,पूरे देश को  एकता के सूत्र में जोड़  सकती है ।
    अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में, केंद्राध्यक्ष श्री धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि ,महात्मा गांधी ने कहा था कि " मैं नहीं चाहता कि, मेरा मकान चारों ओर दीवारों से घिरा रहे और उसकी खिड़कियां बंद हों, मैं चाहता हूं कि सभी देशों की संस्कृति,उन्मुक्त होकर मेरे देश में बहे ,लेकिन मैं  यह नहीं चाहूंगा कि ,इनमें से कोई मेरे पांव उखाड़ दे" श्री श्रीवास्तव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, महात्मा गांधी,जवाहरलाल नेहरू से अच्छी अंग्रेज़ी  जानते थे । जब वे विदेश से लौटकर आए, तो पूरे देश का दौरा उन्होंने किया और यह समझने का प्रयास किया कि, देश को उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक, कौन सी भाषा एक सूत्र में बांध  सकती है और उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि,हिंदुस्तान में हिंदी ही एकमात्र ऐसी समर्थ भाषा है ,जो पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ सकती है। इसीलिए  बापू ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में इस्तेमाल कर ,स्वतंत्रता का इतना बड़ा आंदोलन खड़ा किया और भारत को स्वतंत्रता दिलायी ।अपनी वाणी को विराम देते हुए केंद्राध्यक्ष ने कहा कि,जैसा मुख्य अतिथि ने अभी कहा कि,दुनियां के सबसे  बड़े माने जाने वाले,भाषाविज्ञानी ने यह कहा कि, एक सदी में संवाद की भाषा से काव्यार्थ की भाषा बनी, हिंदी में जो शक्ति है,वह किसी ओर भाषा में उन्हें नहीं दिखती इस बात पर हम सबको गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है और हम सबका यह दायित्व बढ़ 
जाता है कि, हिंदी को,हम आगे बढ़ाएं और केंद्र सरकार की राजभाषा के रूप में हिंदी के कार्यान्वयन में अपने सार्थक प्रयासों को और गति दें,ताकि हिंदी को उसका उचित स्थान मिल सके और हम गौरव का अनुभव कर सकें ।
      इसके पूर्व आकाशवाणी भोपाल के  कार्यक्रम प्रमुख श्री विश्वास केलकर नेकहा कि,इसमें कोई दो राय नहीं कि,हिंदी ही एकमात्र संपर्क भाषा के रूप में श्रेयस्कर भाषा है जो भारत में अपना  स्थान बना सकती है, लेकिन जिस तरह से अंग्रेजी को रोजगार से जोड़ा गया है, उसी तरह से हिंदी को भी रोजगार से जोड़ना जरूरी है।  आपने आगे कहा कि,जब हिंदी में रोजगार मिलने की संभाबनाएं बढ़ेंगी,तो निश्चित ही हिंदी,स्वतः तीव्र गति से, आगे बढ़ेगी । आपने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि,भारत में हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो संपर्क भाषा के रूप में, पूरे देश को एकजुट कर सकती है। अतः  हम सब का यह दायित्व है कि,हम हिंदी को राजकाज की भाषा अर्थात राजभाषा के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास करें ।
    कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अधिकारी श्री सत्येंद्र पाल सिंह ने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष ,विशेष अतिथि और कार्यक्रम में उपस्थित समस्त अधिकारियों व कार्मिकों के प्रति आभार व्यक्त किया ।
     हिंदी राजभाषा मास/हिंदी पखवाड़े का आयोजन  वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी/प्रभारी राजभाषा अधिकारी श्री राजेश वंजानी के निदेशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । पखवारे के दौरान श्रीमती संगीता कोष्टा का सराहनीय योगदान रहा । पखवारे के दौरान श्रीमती संगीता कोष्टा का सराहनीय योगदान रहा ।
योगदान-राजीव श्रीवास्तव, आकाशवाणी भोपाल

Navratri - Celebrating Women Power of PB - Akashvani Indore




Every year we celebrate Navratri in the honor of the divine feminine Devi - Maa Durga. In Prasar Bharati Parivar blog, we are celebrating Navratri with women empowerment. Unlike Maa Durga they do not have several hands and powers, but still work efficiently in each and every field they are assigned. Let us empower women by promoting their participation in all areas. 

Here is a Group photo of women employees of Akashvani Indore, who are great strength / Power to the organisation.

Any PB Parivar member / Station can send such Group photo of women employees of their station at nairbpbpariwar@gmail.com and we will be happy to publish it on PB Parivar Blog www.airddfamily.blogspot.in to celebrate Nav-Durga in a different way.....


AIR रायपुर में सहायक अभियंता (सिविल) CDC - आर के यदु जी 30 सितम्बर को सेवानिवृत




आकाशवाणी रायपुर केंद्र के सिविल विंग में सहायक अभियंता (सिविल) के रूप में सेवाएं दे रहे श्री रमेश कुमार यदु जी दिनांक 30 सितंबर 2019 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विदित हो कि श्री यदु जी 15 दिसंबर 1983 को आकाशवाणी रायपुर में सेक्शनल ऑफिसर के पद पर पहली बार ज्वाइन किए थे। आकाशवाणी रायपुर केंद्र से आपका ट्रांसफर 4 जून 1987 को आकाशवाणी जगदलपुर हो गया। जगदलपुर से फिर 25 मई 1991 में आपका ट्रांसफर आकाशवाणी जबलपुर केंद्र हो गया। तत्पश्चात 2 नवम्बर 1992 में आप आकशवाणी रायपुर केंद्र आ गए और यहां 13 अप्रैल 1998 तक कार्यरत रहे। अप्रैल 1998 में आपका ट्रान्सफर सरायपाली हो गया जहां आप जनवरी 2004 तक कार्यरत रहे। सरायपाली से पुन: 22 जनवरी 2004 से आपका ट्रांसफर आकाशवाणी रायपुर केंद्र हो गया जहां आप 30 अप्रैल 2006 तक कार्यरत रहे। रायपुर केंद्र से आपका ट्रांसफर मई 2006 में आकाशवाणी बिलासपुर केंद्र हो गया जहां आप 12 मार्च 2008 तक कार्यरत रहे। 13 मार्च 2008 से आप आकाशवाणी रायपुर केंद्र वापस आ गए जहां आप 31 जनवरी 2012 तक कार्यरत रहे।

रायपुर केंद्र से पुनः आपका ट्रांसफर आकाशवाणी जगदलपुर 9 फरवरी 2012 में हो गया जहां आप 26 अप्रैल 2013 तक कार्यरत रहे। सहायक अभियंता (सिविल)CDC के पद पर 29 अप्रैल 2013 को आकाशवाणी रायपुर केंद्र में आ गए जहां आप अभी कार्यरत हैं।

उल्लेखनीय है कि 2 दिसम्बर 2006 को तत्कालीन राज्यपाल के समक्ष मरणोपरांत देहदान की घोषणा की है । समय समय पर ज़रूरतमंद लोगों को रक्तदान करते रहे हैं ।
 सेवानिवृत्ति के अवसर पर हमारी ओर से तथा प्रसार भारती ब्लॉग परिवार के सदस्यों की ओर से श्री आर के यदु जी को हार्दिक बधाई एवं बहुत शुभकामनाएं ।
प्रसार भारती परिवार उनको इस निवृत्ति पश्चात जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाए देती है । 
अगर कोई अपने ऑफिस से निवृत्त होने वाले कर्मचारी के बारे में कोई जानकारी ब्लॉग को भेजना चाहते है तो आप जानकारी pbparivar @gmail .com पर भेज सकते है.
द्वारा योगदान :- श्री.झावेन्द्र कुमार ध्रुव   jhavendra.dhruw@gmail.com 

Akashvani Annual Award 2018 - Seeking inputs from Winners



The list of prize winners for different categories in Programme Section of Akashvani Annual Award 2018 has been declared. Prasar Bharati Parivar congratulates all the award winners and requests them/Head of their stations to send a small brief about the programme and the production team, source of inspiration for making this programme alongwith a photograph of the production team/any other relevant photograph at pbparivar@gmail.com for possible publication on Prasar Bharati Parivar Blog www.airddfamily.blogspot.com.

हिन्दी पखवाड़ा समापन समारोह – आकाशवाणी वडोदरा





आकाशवाणी वडोदरा में 27 सितम्बर 2019 हिन्दी पखवाड़ा समापन समारोह के उपलक्ष्य में संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महोदय विंग कमांडर श्री पुनीत चड्डाजी,एवं फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुश्री अमन निधि एवं सुश्री खेवना शाह उपस्थित थे।विंग कमांडर पुनीत चड्डा जी ने अपने भाषण के दौरान हिन्दी के प्रचार मे आकाशवाणी के योगदान की सराहना की।उन्होने हिन्दी को राजभाषा से विश्वभाषा बनाने का आह्वान किया।कार्यालय अध्यक्षा श्रीमती मिनाक्षी सिंघवी जी ने कार्यालय में राजभाषा से जुडें कार्यों के लिए सभी को बधाई देते हुए, राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों तक पहुँचने हेतु,हिन्दी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। 

कार्यक्रम में आकाशवाणी के कलाकारों ने बहुत ही सुन्दर समुह गान प्रस्तुत किया।कार्यक्रम निष्पादक श्री कृष्णा भावे ने सहकर्मियों के हिन्दी के प्रति लगाव की सराहना की ।अंतमेंश्री डी॰एम॰ नवाणी सहायकनिदेशक(अभियांत्रिकी)द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया।

ब्लॉग रिपोर्ट :आकाशवाणी वडोदरा
ईमेल : airvadodara@gmail.com

अपर महानिदेशक अभियांत्रिकी श्री एम.एस.अंसारी का एक दिवसीय रायपुर प्रवास











28 सितम्बर 2019 को आकाशवाणी महानिदेशालय नई दिल्ली के अपर महानिदेशक अभियांत्रिकी श्री एम.एस.अंसारी एक दिवसीय प्रवास पर आकाशवाणी रायपुर पहुंचे । अपने इस संक्षिप्त प्रवास के दौरान आकाशवाणी रायपुर के अधिकारियों के साथ एक बैठक किए । इसके पश्चात् उनके द्वारा स्टूडियो एवं कार्यालय का निरीक्षण किया गया । इस दौरान आकाशवाणी रायपुर के निदेशक अभियांत्रिकी एवं केन्द्राध्यक्ष श्री संजय कुमार मिश्रा और सहायक निदेशक अभियांत्रिकी श्री विजय कुमार शर्मा कार्यक्रम अधिशासी श्री समीर शुक्ल सहायक अभियन्ता श्री यू.सी.गुप्ता उपस्थित थे । इस एक दिवसीय संक्षिप्त प्रवास के दौरान श्री अंसारी जी ने आकाशवाणी रायपुर के आपसी समन्वय की भरपूर प्रशंसा की साथ ही स्टूडियो एवं कार्यालय के साफ.सफाई से रूबरू हुए एवं संतोष व्यक्त किया ।

प्रेषक :- श्री. संजय कुमार शर्मा, आशुलिपिक ग्रेड-1
raipurair@gmail.com

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