Prasar Bharati

“India’s Public Service Broadcaster”



Thursday, July 9, 2020

Indoor fogging and awareness session held at Akashvani Mangalore

Indoor fogging and awareness session held at Akashvani Mangalore , our sincere thanks to the health department , thanks to Dr Naveen Chandra Kulal and Sri Chandrashekhar

All staff members participated in the drive.

Source : fb page of Chandrashekhar Shetty

Wednesday, July 8, 2020

Obituary : Mr. S.T.Sailo, Former D.D.G.(P), Doordarshan is no more.

Mr. S.T.Sailo , Former D.D.G.(P), Doordarshan  passed away today at 2:15pm in Aizawl. He was a popular broadcaster in North East India.

Prasar Bharati Parivar condoles the demise of Shri. S. T. Sailo and prays to the almighty for the peace of the departed soul. 

Source-FB page of Mr.Subhash Thaledi. 

Contributed by -P.K.Tripathi, Lucknow.

How to be fearless: motivational video

Credit and source: Sandeep Maheshwari you tube channel

Tuesday, July 7, 2020

आकाशवाणी सरायपाली केन्द्र के पूर्व इंजीनियर देवेंद्र कुमार प्रधान, छत्तीसगढ़ सीएम के OSD बने

आकाशवाणी सरायपाली केन्द्र में इंजीनियरिंग असिस्टेंट के पद पर कार्यरत रहे श्री देवेंद्र कुमार प्रधान (रा.प्र.से.2018) डिप्टी कलेक्टर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी OSD नियुक्त किया गया है ।

श्री प्रधान जी, जब आकाशवाणी में कार्यरत थे तब वे परीक्षा पास किए थे । उसके बाद आप डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं ।

छत्तीसगढ़ सीएम के OSD बनाये जाने पर श्री देवेंद्र कुमार प्रधान को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.!

Inspiration : Inspiring story of DRDO Scientist appointed by PM Narendra Modi.

He is Pratap aged 21 years. He travels 28 days in a month to foreign countries.France has invited him to join their Organisations for which he will be provided with monthly salary of Rs 16 Lakhs, 5 BHK house and Car worth 2.5Cr.But he simply declined. PM Modi has honored him with suitable award and has asked DRDO to absorb him.
Let us see what this boy from Karnataka has achieved. 

*Part 1*
He was born in a remote village in Kadaikudi near Mysore Karnataka. His father earns Rs 2000 as a farmer. Pratap was interested in Electronics right from childhood. While studying plus 2 he acquainted himself with various websites such as Aviation ,Space, Rolls Royce car, Boeing 777 etc from a nearby Cybercafe .He sent several emails to Scientists all over the world in his Butler English about his interest to work but in vain . He wanted to join Engg but due to financial problems he joined BSc ( Physics) again unable to complete the same. He was thrown out of hostel for not paying the hostel fees. He used to sleep in Mysore Bus stand and used to wash his clothes in public toilet. He learnt computer languages such asC++JavaCore and Python on his own. He learnt about *Drone* through eWaste. After 80 attempts he succeeded developing one such Drone. 

*Part 2*
He went to IIT Delhi in rags in a unreserved compartment to participate in Drone model competition. He won *Second prize*.He was told to participate in a competition in Japan. To go to Japan an academic Professor in Chennai college has to approve his thesis .He went to Chennai for the first time and with great difficulty that Prof approved him with some comments that he is not qualified to write it. 

Pratap required Rs60000 to go to Japan ,a philanthropist from Mysore sponsored his flight ticket and balance money he made up by selling his mother's Mangala Sutra. Somehow he reached Tokyo after going in his maiden flight to Japan all alone. He had only Rs 1400 when he landed there. He didn't take Bullet train since it was very expensive so he went by normal train by changing trains at 16 different stations with his luggage to reach his last station. He walked another 8 km to reach the ultimate destination with his luggage. 

He participated in a Exposition where 127 nations were participating.The results were announced in a graded manner and finally top 10 . Pratap dejectedly started walking back and slowly the judges were inching to top 3,2, and finally the First prize was announced as *Please welcome Mr Pratap Gold Medalist from India*.He was crying with joy. He saw with his own eyes USA flag going down and Indian flag going up. He was rewarded with 10000$ and celebrations followed everywhere. He was called by PM Modi ,Karnataka MLA & MP and was honoured by all. France offered him a job with all the perks of very high order. He simply refused and now PM has honoured him and has asked DRDO to absorb him.

Credit :

Monday, July 6, 2020

आकाशवाणी रायपुर के उदघोषक अनिल सालोमन , 30 जून को सेवानिवृत हुए।

आकाशवाणी रायपुर केन्द्र में उदघोषक के पद पर कार्यरत श्री अनिल सालोमन जी, दिनांक 30 जून को सेवानिवृत हुए । आप विदित हों कि आकाशवाणी शहडोल केन्द्र से अपनी कैरियर की शुरूआत 2 दिसम्बर 1996 को उद्धोषक के पद पर ज्वाइन कर किए थे । इसके पूर्व आप आकाशवाणी जबलपुर केंद्र में कम्पीयर के रूप में जुड़े हुए थे । शहडोल केंद्र से अक्टूबर 2002 में आपका ट्रांसफर आकाशवाणी रायपुर केन्द्र में हुआ । आप रायपुर केन्द्र में 18 अक्टूबर को ज्वाइन किए थे, तब से आप अभी तक इसी केन्द्र में कार्यरत हैं ।

सालोमन जी, मूलत: मध्यप्रदेश के मंडला जिले के पास एक गांव - पादरी पटपरा के रहने वाले हैं | आपकी शिक्षा गांव व शहर दोनों जगह हुई है । वैसे कक्षा पांचवीं तक की शिक्षा गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल से लिए फिर आगे की शिक्षा शहर से ही ग्रहण लिए । 

बहरहाल,  दिनांक 30 जून को सेवानिवृत के अवसर पर हमारी ओर से तथा हमारे प्रसार भारती व्लॉग परिवार के सभी सदस्यों की ओर से अनिल सालोमन जी को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं...! 

Wish you Happy Retirement life..

द्वारा अग्रेषित :-  श्री झावेन्द्र कुमार ध्रुव रायपुर

Inspirational:स्कूली छात्रों की पहल, घर-घर जाकर इकट्ठी करते हैं दवाइयां ताकि ज़रूरतमंदों तक पहुँचा सकें!

अक्सर लोगों के बीमारी से ठीक होने के बाद, उनकी बहुत-सी दवाईयां बच जाती हैं। ज़्यादातर घरों में आपको ऐसी बहुत-सी ऐसी दवाईयां मिल जाती हैं। कुछ समय बाद, हम इन दवाईयों को डस्टबिन का रास्ता दिखा देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि जिस तरह इंजेक्शन की सूई का सही तरह से डिस्पोजल ज़रूरी है, वैसे ही दवाईयों का डिस्पोजल भी ज़रूरी होता है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, भारत के रजिस्टर्ड हेल्थकेयर सेक्टर से प्रति दिन लगभग 4,057 टन मेडिकल वेस्ट उत्पन्न होता है। साथ ही, भारत पूरे विश्व के लिए दवाओं के उत्पादन का केंद्र रहा है, लेकिन दवाइयों का सही निपटान न होना एक गंभीर समस्या है। दक्षिण भारत के एक इंडस्ट्रियल इलाके से मिले वेस्टवाटर के टेस्ट में एंटीबायोटिक की मात्रा काफी अधिक थी। सिप्रोफ्लोक्सासिन जैसे लगभग 21 दवाईयां इतनी ज्यादा मात्रा में इस पानी में छोड़ी गईं कि इन दवाईयों से लगभग 90,000 लोगों का इलाज किया जा सकता था।

हमारे देश की विडंबना यही है कि एक तबके के पास इतना ज्यादा है कि उनके यहाँ महंगी से महंगी दवाईयां भी कचरे में जाती है। तो वहीं, एक तबका इतना गरीब है कि वे दवाईयों पर शायद दस रुपये भी खर्च नहीं कर सकते। लेकिन अच्छी बात यह है कि इन दोनों तबकों के बीच इस खाई को पाटने का काम मुंबई के तीन युवा कर रहे हैं।

युग सांघवी, कृष्य मनियार और अयान शाह, तीनों दोस्त धीरुभाई अम्बानी इंटरनेशनल स्कूल में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। ये तीनों मिलकर, ‘शेयर मेड्स’ नाम से एक अभियान चला रहे हैं, जिसके अंतर्गत ये समृद्ध तबके के घरों से बची हुई, लेकिन बिल्कुल सही दवाईयां लेकर चैरिटेबल क्लीनिक्स को देते हैं ताकि वहां से ये ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँच सकें। इससे ज़रूरतमंदों की मदद भी हो रही है और साथ ही, मेडिकल वेस्ट भी कहीं न कहीं कम हो रहा है।

युग बताते हैं कि शेयरमेड्स की कहानी उनके दादाजी से शुरू होती है। उनके दादाजी को कैंसर डिटेक्ट हुआ और उनके परिवार ने हर संभव इलाज़ कराया। इस बीच उन्होंने कई उतार-चढाव देखे। “उनकी दवाईयां बहुत महंगी थीं। मैं एक समृद्ध परिवार से हूँ तो हम सारा खर्च मैनेज कर पाए। लेकिन उस समय मेरे दिमाग में आया कि गरीब लोग कैसे इतना कुछ मैनेज करते होंगे। इस एक विचार से मुझे लगा कि क्या हम कुछ कर सकते हैं और वहां से मैंने एक कजिन के साथ मिलकर ‘शेयरमेड्स’ का सफ़र शुरू किया,” उन्होंने आगे बताया।

साल 2017 से युग और उनके कजिन ने अपने स्तर पर लोगों से उनके घरों में बची हुई दवाईयां इकट्ठा करना शुरू किया। उनका उद्देश्य इन दवाईयों को इकट्ठा करके इन्हें चैरिटेबल डॉक्टर्स तक पहुँचाना था। युग अपने लेवल पर काम कर रहे थे और लोगों को इस बारे में जागरूक भी कर रहे थे कि कैसे उनकी ये मदद ज़रूरतमंद लोगों के काम आ सकती है।

साल 2019 में युग के इस सफर में उनके दोस्त, कृष्य और अयान भी जुड़ गए और तब से ये तीनों मिलकर इस अभियान को हर दिन बड़ा बनाने में जुटे हुए हैं। कृष्य बताते हैं कि फ़िलहाल वे बांद्रा, घाटकोपर, सांताक्रुज़ के इलाकों में काम कर रहे हैं।

समृद्ध और ज़रूरतमंदों के बीच बने सेतु:

अयान बताते हैं कि उनके इस अभियान के मुख्य दो काम है- पहला, दवाईयां इकट्ठा करना और दूसरा, इन दवाईयों को चैरिटेबल क्लिनिक्स और ट्रस्ट आदि तक पहुँचाना। लेकिन इसके पूरी प्रक्रिया में और भी बहुत-से ज़रूरी स्टेप्स हैं जिन्हें वे फॉलो करते हैं।

“सबसे पहला काम होता है लोगों को जागरूक करना। शुरुआत में, हम घर-घर जाकर दवाईयां इकट्ठा करते थे, पहले लोगों को बताते कि हम क्या कर रहे हैं और फिर उनके यहाँ से दवाईयां लेते। लेकिन अभी हम अलग-अलग जगह ड्राइव्स करते हैं,” युग ने बताया।

शेयर मेड्स मुंबई के अलग-अलग इलाकों में अब तक 14 ड्राइव्स कर चूका है, जिनमें मलाड, वोर्ली जैसे इलाके भी शामिल हैं। अपनी प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए अयान आगे बताते हैं, “हम जिस सेक्टर में काम कर रहे हैं, वहां हमें हर चीज़ का बहुत ध्यान रखना होता है। सबसे पहले तो हम उन दवाईयों को लेते हैं, जिनका बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं हुआ है और जिनकी एक्सपायरी तारीख बहुत बाद की है। इसके अलावा, दवाईयां अच्छे से पैक है इस बात को भी ध्यान में रखा जाता है। ख़ासतौर पर, सिरप आदि के मामले में, बिना सील पैक्ड सिरप हम नहीं लेते।”

कृष्य की माँ डॉक्टर हैं और उनके मार्गदर्शन में ही दवाईयों को इकठ्ठा करने के बाद अलग-अलग करके उनका कैटेलॉग तैयार किया जाता है। ताकि उनके पास एक रिकॉर्ड रहे। सभी दवाईयों को अच्छे से चेक किया जाता है और उसके बाद ही चैरिटेबल ट्रस्ट और क्लीनिक्स को दिया जाता है। यहाँ पर भी दवाईयां फिर से चेक होती हैं और उसके बाद ही मरीज़ों को दी जाती हैं।

युग कहते हैं कि कृष्य की माँ के डॉक्टर होने से उन लोगों को इस अभियान में काफी मदद मिल रही है। साथ ही, उनके फैमिली डॉक्टर्स भी उनके इस काम की सराहना करते हुए, उन्हें ऐसे डॉक्टरों से जोड़ रहे हैं, जो गरीब तबके के लिए काम करते हैं। बहुत-से डॉक्टर मुंबई के आस-पास के गांवों और कच्ची बस्तियों में लोगों के लिए मुफ्त मेडिकल कैंप लगाते हैं।

कृष्य कहते हैं कि पिछले एक साल में उन्होंने लगभग 15 हज़ार टेबलेट स्ट्रिप्स जमा करके दान की हैं। इनमें बुखार से लेकर सभी तरह की विटामिन आदि तक की दवाईयां थीं।
सफ़र की चुनौतियाँ:

Source: The Better India

Sunday, July 5, 2020


Hindi version
Tamil version
Kannada version

Master P. Praneel, studying in Class IV in St. Joseph’s Central School, Vijayanagar, Mysore, son of Mr. Premkumar P. Wellington, All India Radio, Mysore and Dr. Vijayalakshmi Manapura, Assistant Professor, Maharaja’s College, University of Mysore, has sung the Awareness Song in Hindi Language titled “Killer Corona ; Mahamaari Kaa Kaala Saayaa” in rich, sweet and melodious voice is widely shared across the Country through Social Networking Medias/Websites and has become popular and has been appreciated all over India. The song call people, to change their lifestyle and adopt hygiene practices to fight the pandemic and avoid handshakes as well as physical proximity to others, asks senior citizen and children who are prone to the infection to stay indoors, maintain Social Distancing and follow Government Orders. Notably, the song highlights fake news Covid-19 and speaks about the contribution of health workers who are in the frontline fighting the pandemic. This song also lessens the burden of District Administration in spreading awareness among masses.

Master P. Praneel of Class IV said, “The motto of the song is to create and generate awareness on Covid-19 and to bring back normal situation in our Motherland India”


Mysore Diocesan Educational Society (MDES) Management has recognised the efforts and has issued a “Certificate of Appreciation” to Master P. Praneel of Class IV. MDES Secretary-Rev. Father. Vijay Kumar, CEO-Mrs. Joyce Lobo, St. Joseph’s Central School, Vijayanagar - Principal-Mrs. Mary Margaret Nirmala, Vice Principal-Mrs. Susie Pinto, have highly appreciated his efforts in generating and spreading awareness on COVID-19 with wonderful lyrics and such melodious singing in the society and congratulated Master P. Praneel as a “SURE ASSET” for Mysore Diocesan Educational Society (MDES) Institution.

First, Dr. Vijayalakshmi Manapura, has written the lyrics, composed the music and sung the song in Kannada in folk style titled “Coronaada Karineralu”. Premkumar P. Wellington has translated the song to Hindi and Tamil. Master P. Praneel and his father Premkumar P. Wellington have sung its Tamil version titled “Coronaavin Karuppu Nilal”. Master P. Praneel, alone has sung solo its Hindi version titled “Killer Corona ; Mahamaari Kaa Kaala Saayaa” in rich, sweet and melodious voice.

The Hindi version video is available in the YouTube link and the Tamil version video is available in the YouTube link and the Kannada version is available in the YouTube link
These Unique Awareness Songs sung by the family of three are published in English News Paper – Indian Express, Times of India, The Andaman Express, Deccan Herald and Star of Mysore and Hindi News Paper – Rajasthan Patrika and Odiya News Paper – Odisha Express and Kannada News Paper – Mysuru Mithra and Tamil News Paper – Dina (Daily) Thanthi and Dinamalar and interviewed by Doordarshan Chandana TV Channel.

Contributed by :- Shri. Premkumar P. Wellington, All India Radio, Mysore.

All India Radio Broadcast Its First Ever News Magazine Program In Sanskrit - News Report

The All India Radio (AIR) has broadcast its first-ever news magazine program in Sanskrit on Saturday. "In keeping with its spirit to give a fillip to Indian languages, All India Radio has broadcast its first-ever news magazine program in Sanskrit on Saturday, July 4. The program titled, "Sanskrit Saptahiki" is of 20 minutes duration and can be heard on All India Radio FM News Channel, 100.1 MHz frequency every Saturday with a repeat broadcast on Sundays," said a press release from Prasar Bharati.
It said that the weekly program will have elements from the prominent developments of the week, news from the world of Sanskrit, explaining the humane values enshrined in Sanskrit literature, philosophy, history, art, culture and tradition. It will give voices to the children and youth and their feelings about the great Indian tradition and culture.
"Its components are Sukti, Prasang, Saptahiki, Sanskrit Darshan, Gyan Vigyan, Bal Vallari, Ek Bharat -Shreshtha Bharat & Anvikshiki to feature in the News Magazine. Under the Sukti, a quote from Sanskrit literature in the form of a Shloka will be explained. Prasang will tell the story of the week from the field of Art, culture, tradition, history and epics like Ramayana, Mahabharat, Geeta, Upnishads, Vedas etc. Interview with a leading light in Sanskrit will be a key element under Gyan-Vigyan. The Bal Vallary segment will have poetry or storytelling by children and youngsters in Sanskrit to popularize the language," the press release said.
It further said, "An interesting feature is the Ek Bharat Shreshtha Bharat wherein five commonly used words will be translated from Sanskrit to Hindi and another Indian language every week. First edition has it in Hindi, Sanskrit and Marathi."
"The closing segment, Anvikshiki takes a look at the major historical event of the week with the focus on India's rich culture and tradition. All in all, a treat for the Sanskrit lovers across the country," it added. (ANI)

Source and Credit :-                                                                     Forwarded by :- Shri. Jhavendra Kumar Dhruw.

In Tribute: Bengaluru’s Beloved ‘RJ-Auto Driver’, Who Donated Books Worth Rs 1 Lakh

If you ever tuned into Radio Active, Bengaluru, during your long commutes, you were sure to catch Radio Jockey (RJ) Shivakumar hosting a unique show, in which he would go around the city, interviewing auto drivers.What problems does a common auto driver face? What do they eat for lunch when they are several kilometres away from their home? Why are the fares surging? Shivakumar’s candid conversations brought forward a never-heard-before perspective.What made auto drivers open up to this RJ so easily? For one, Shivakumar also drove an auto for a living—he was only a part-time RJ with Radio Active. He also ran the Gurukul Seva Trust in Bengaluru to help underprivileged students.

A man donning many hats, Shivakumar (fondly known as Auto Shivu) was a popular personality in the city. Unfortunately, on May 22, he succumbed to cancer at the age of 54.
Shivakumar had decided to pursue auto-driving as an occupation after being inspired by the 1980 Kannada film, Auto Nag. Much like any hero of a film, he went on to embody a kind, generous and charismatic personality to make his passengers’ ride smooth.There are many reasons why he stood out—and the first was quite literal. In the crowd of black hooded autos, his was brightly coloured, with photos of eminent writers, social workers, freedom fighters.

He started an initiative, called the Gurukul Seva Trust, to help underprivileged students with books and uniforms. A class 8 dropout himself, he understood the importance of education and didn’t want marginalised students to miss out because of their financial troubles.The man firmly believed that a teacher must always be ready to teach and in turn, the student must respect the guru. “To spread this message, I have written short poems and printed posters that talk of the teacher-student relationship. I have distributed posters to over 1,500 government and private schools,”.

From the money collected in these initiatives, Shivakumar would donate books and uniforms to the needy students. By 2018, he would donate these essentials worth Rs 1 lakh every year!
Source:The  better India

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