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Tuesday, December 22, 2015

My Retired Life : श्री विजय शंकर चटर्जी:जिनके दिल में कश्मीर अभी तक रचा-बसा है !




प्रसार भारती ब्लॉग के पाठकों को आज मैं श्री विजय शंकर चटर्जी के बारे में बताने जा रहा हूँ जो इसराज नामक दुर्लभ वाद्य में आकाशवाणी के 'ए' ग्रेड के कलाकार तो हैं ही ,आकाशवाणी में पहले एक वादक कलाकार फिर प्रोड्यूसर और कार्यक्रम अधिकारी पद पर रहकर उन्होंने लम्बी सेवाएं भी दी हैं।लखनऊ के एक सभ्रांत बंगाली परिवार में 18 मई 1950 को उनका जन्म हुआ था ।लखनऊ के ही विद्या मंदिर स्कूल से हाई स्कूल और डी० ए० वी० कालेज से इंटर उत्तीर्ण करके श्री चटर्जी ने प्रयाग संगीत समिति से संगीत प्रभाकर और फिर भातखंड संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय लखनऊ से संगीत विशारद डिग्री प्राप्त की ।इसराज इनका प्रिय वाद्ययंत्र था और गहन अभ्यास करने से इन्हें 1966में अखिल भारतीय स्तर पर सम्पन्न आकाशवाणी संगीत प्रतियोगिता में इसराज वादन में पुरस्कार और ग्रेड भी मिला ।आकाशवाणी लखनऊ में इन्होंने कार्यक्रम देना शुरू कर दिया और उसी केंद्र पर उन दिनों वादक कलाकार पद पर इन्हें सेवा देने का प्रस्ताव भी मिला किन्तु इन्होंने 1975 में संगीत शिक्षक के रूप में बिड़ला विद्या मंदिर नैनीताल से आये प्रस्ताव को स्वीकार किया ।

जैसी कि एक कहावत है -"जैसे उड़ि जहाज को पंछी पुनि जहाज को आवे ,मेरो मन अनत कहां सुख पावे ।"श्री चटर्जी को आकाशवाणी की दुनिया अपनी ओर लगातार खींच रही थी और जिसके चलते एक बार फिर 1975 में ही पहली अक्टूबर को रेडियो कश्मीर श्रीनगर में इन्होंने इसराज वादक विभागीय कलाकार पद पर कार्य भार ग्रहण किया । यद्यपि इसराज संगत वाद्य के रूप में वहाँ उन दिनों कम प्रचलन में था किन्तु युवा चटर्जी ने अपनी प्रतिभा और लगन से कम समय में घाटी में अपना प्रतिष्ठित स्थान बना लिया ।हर कलाकार इन्हें अपने साथ संगत करने के लिए आतुर रहने लगा ।लेकिन इन्हें अभी और मंजिलें तय करनी थीं सो 1978 के अंतिम महीनों में की श्री एल० के० पंडित और श्री के० के० नैय्यर के सुझाव पर इन्होनें प्रोडयूसर संगीत पद के Limited selection में इंटरव्यू दिया ,सफल हुए और पहली जनवरी 1979 को नई दिल्ली आकाशवाणी महानिदेशालय में आर्काइव सेक्शन में संगीत प्रोड्यूसर पद पर कार्यभार ज्वाइन कर लिया ।31 दिसम्बर 1983 तक यहाँ अपनी सेवाएँ देने के बाद इन्होंने आकाशवाणी के वाराणसी, विविध भारती मुम्बई ,एफ० एम० रायगढ़(म० प्र०), सी० बी० एस० कानपुर, आकाशवाणी जोधपुर, एफ० एम० चित्तौड़गढ़, और अन्त में 03 जुलाई 2006 से रिटायरमेंट तक आकाशवाणी लखनऊ केंद्र पर अपनी सेवाएँ दीं । अपनी विविध भारती में पोस्टिंग के दौरान इन्होंने विविध भारती के लिए अनेक उत्कृष्ट कार्यक्रम बनाए जिसमें धर्म और संगीत को आधार बनाकर तैयार किया गया कार्यक्रम विशेष चर्चित रहा है । 

मई वर्ष 2010 में कार्यक्रम अधिकारी (शास्त्रीय संगीत) पद से आकाशवाणी लखनऊ में इनका रिटायरमेंट हुआ ।इसराज वाद्ययंत्र विषयक इनके अनेक लेख पायनियर, गान्डीव, आज, संगीत नामक पत्र पत्रिकाओं में छपे ।लघुकथाओं का प्रकाशन नवजीवन में हुआ । इन्होंने कुछ कश्मीरी फिल्मों और डाक्यूमेंट्री में पार्श्व संगीत दिया है ।अनेकों पुरस्कार भी मिले हैं ।आकाशवाणी लखनऊ से शास्त्रीय संगीत विषयक इनका तैयार किया गया शोधपरक कार्यक्रम "संचयन"संगीत जगत में सराहा गया था ।

श्री चटर्जी वर्तमान में लखनऊ के मोतीनगर मुहल्ले के अपने पुश्तैनी मकान में अपने छोटे भाई के परिवार के साथ रह रहे हैं ।एक मुलाक़ात में मेरे साथ हुई चर्चा में उन्होंने एफ० एम० पर संगीत के एक राष्ट्रीय चैनल के 24घन्टे प्रसारण की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि आकाशवाणी शुरु से ही संगीत और कलाकारों को संरक्षित करती रही है ।व्यावसायिकता के दबाव को उसे नज़र अंदाज़ करते हुए अपने इस शुभ काम को जारी रखना चाहिए ।कश्मीर की वादियों की यादें उन्हें आज भी पुलकित कर दिया करती हैं और उनके अनुसार वहां बिताए शुरुआत के चार साल बेहद रोमांचक रहे हैं ।हिन्दी, अंग्रेज़ी और बांग्ला भाषाओं में समान दक्षता रखने वाले श्री चटर्जी ने कुछ जिम्मेदारियों के चलते शादी नहीं की और इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने ठहाके मारते हुए ब्राडकास्टिंग के चलते फिरते इन्साइक्लोपीडिया जनाब के० के० नैय्यर साहब का एक शेर सुनाते हुए अपनी बातों को विराम दिया -
"मुंतज़िर कोई तो दिल होगा जहां में मेरा ,
मै खलाओं में भटकती हुई आवाज़ सही ।"

उनके आवास का पता है - ज्योति कुंज, मकान नं० 289/302, मोतीनगर ,लखनऊ-226004
मोबाइल नं० है 9005051066
श्री चटर्जी इन दिनों सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस से पीड़ित हैं जिसके चलते उनका इसराज वादन भी प्रभावित हो गया है ।फिर भी यथासंभव अभ्यास जारी है और पूरी तरह अध्ययन -मनन और श्रवण का काम चल रहा है ।
प्रसार भारती परिवार उनके उत्तरोत्तर स्वास्थ्य लाभ की कामना करता है और उनकी सेवाओं के लिए उन्हें साधुवाद देते हुए मंगलमय जीवन की कामना करता है ।
*ब्लॉग रिपोर्टर -प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी(से० नि०), लखनऊ ।मोबाइल नं० 9839229128,darshgrandpa@gmail.com

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