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Friday, August 28, 2020

श्रद्धांजलि : स्व0 वी. बी. राय (IBES), डिप्टी डायरेक्टर(इंजी.) की 11वीं पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन







आकाशवाणी गोरखपुर और इंफाल केंद्र के केंद्राध्यक्ष रह चुके तथा कई अन्य केंद्रों पर कार्य कर चुके स्व. वी.बी. राय, उपनिदेशक (अभि.) की 28 अगस्त 2020 को 11वीं पुण्यतिथि है।

मूलत: ग्राम-पतनई, दोहरीघाट, मऊ (उ.प्र.) के निवासी स्व. विजय बहादुर राय ने आकाशवाणी की अपनी दीर्घकालीन सेवा की शुरुआत अभियांत्रिकी सहायक (EA) के रुप में आकाशवाणी बीकानेर से 1972 में की थी । 1992 में स्व. श्री राय की पदोन्नति "भारतीय प्रसारण अभियांत्रिकी सेवा" (IBES) अधिकारी के रूप में ग्रुप-A में सहायक केंद्र अभियंता (ASE) के रूप में हुई और 2003 में पुनः पदोन्नति पाकर आप केन्द्र अभियन्ता बने। इस पद को अब उपनिदेशक (अभियांत्रिकी) के नाम से जाना जाता है। अपने सेवाकाल की ज्यादातर अवधि आकाशवाणी गोरखपुर को देने वाले राय साहब को आकाशवाणी प्रसारण की तकनीकी में विशेषज्ञता हासिल थी। स्टूडियो की मशीनें हों या उच्च शक्ति ट्रांसमीटर का रखरखाव, दोनों जगहों पर उनकी पकड़ मजबूत थी। अपने मृदुल व्यवहार के कारण वे कार्यक्रम, प्रशासन और तकनीकी सभी विभागों में प्रिय थे।


आइये, उनकी पुण्यतिथि पर उनके जीवन वृत्त पर एक विहंगम दृष्टि भी डाल लें।
जन्म - 02 जुलाई 1951, ग्राम-पतनई, पोस्ट- दोहरीघाट, तत्कालीन आज़मगढ़ (अब मऊ जिला), उत्तर प्रदेश।
पिता - स्व0 रामनाथ राय, ऑडिटर, बजट अनुभाग, लखनऊ सचिवालय, उ0प्र0।
माता जी- स्व0 फूलमती देवी। वे कुल 3 भाई थे और उनकी 2 बहनें थीं। भाइयों मे श्री राय सबसे बड़े थे। इनके छोटे भाई स्व. तेज बहादुर राय, यूपी पॉवर कारपोरेशन से अधीक्षण अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए और सबसे छोटे भाई श्री राज बहादुर राय, सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्राध्यापक के रूप में सेवानिवृत्त हुए।

● कक्षा 8 तक की इनकी शिक्षा गांव के ही प्राइमरी स्कूल से हुई।


● 1965 में 10वीं हाई स्कूल परीक्षा (प्रथम श्रेणी में) कुर्मी क्षत्रिय हायर सेकेण्डरी (अब रामाधीन सिंह इंटर कालेज), बाबूगंज, लखनऊ से उत्तीर्ण की।


● 1967 में इंटरमीडिएट (10+2) प्रथम श्रेणी में, राजकीय जुबिली इंटर कालेज, लखनऊ से उत्तीर्ण की।

● 1969 में B.Sc. (प्रथम श्रेणी में) लखनऊ विश्वविद्यालय से किया।

● 1971 में M.Sc.-भौतिकी (प्रथम श्रेणी) में "रेडियो कम्युनिकेशन" विषय से विशेषज्ञता के साथ, लखनऊ विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की।


पढ़ाई के बाद, आपने नौकरी की शुरुआत उ.प्र. सरकार के सिचाई विभाग में "शारदा सहायक परियोजना" में "सुपरवाइजर" के पद से की।

आकाशवाणी में सेवा की शुरुआत उन्होंने भारत-पाक युद्ध के समय 01 जनवरी 1972 को भारत-पाक सीमा के निकट आकाशवाणी बीकानेर में अभियांत्रिकी सहायक (EA) के रूप में नियुक्ति से की। 1973 में इसी पद पर आकाशवाणी गोरखपुर स्थानांतरित होकर आए।

16 अप्रैल 1982 को आकाशवाणी लेह में वरिष्ठ अभियांत्रिकी सहायक (S.E.A.) पद पर प्रोन्नत हुए। जुलाई 1982 में वे आकाशवाणी गोरखपुर वापस आये।

इसके बाद उनका प्रमोशन सहायक अभियन्ता (A.E.) के रूप में जनवरी 1984 में गोरखपुर केंद्र पर ही हुआ । इस दौरान उनका ट्रांसफर प्रोजेक्ट विंग में भी हुआ जहाँ संस्थापन अधिकारी ( Installation Officer) के रूप में (1989-1992) आकाशवाणी गोरखपुर में नेपाली भाषा मे प्रसारण हेतु 50 KW शार्टवेव(SW) ट्रांसमीटर, आकाशवाणी लखनऊ के चिनहट ट्रांसमीटर, और आकाशवाणी वाराणसी के सारनाथ ट्रांसमीटर के संस्थापन (Installation) का कार्य कुशलता पूर्वक सम्पन्न करवाया।

01 जनवरी 1992 को स्व. राय साहब की पदोन्नति "भारतीय प्रसारण अभियांत्रिकी सेवा" (I.B.E.S.) अधिकारी के रूप में ग्रुप-A में सहायक केंद्र अभियंता (ASE) के रूप में हुई और वह आकाशवाणी गोरखपुर में पदस्थापित हुए।
अक्टूबर 2000 में, उनका तबादला आकाशवाणी महानिदेशालय, नई दिल्ली के "योजना एवं विकास एकक/ P&D यूनिट" में सहायक निदेशक के रूप में हुआ, जहाँ उन्होंने उस समय देश भर में खुलने वाले बहुत सारे FM स्टेशनों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अक्टूबर 2003 में राय साहब पुनः प्रोन्नत होकर केंद्र अभियन्ता (Station Engineer) के रूप में मणिपुर राज्य की राजधानी इंफाल के "आकाशवाणी केन्द्र" के केंद्राध्यक्ष (Head of Office) बने। मणिपुर राज्य के सभी केंद्र (चूराचांदपुर और शिशिरपुर) भी आकाशवाणी इंफाल के अन्तर्गत ही आते हैं, ऐसे में, आपने अतिसंवेदनशील और तनावग्रस्त मणिपुर राज्य के सभी आकाशवाणी केंद्रों का प्रमुख रहते हुए "केंद्राध्यक्ष" के रूप में पूरे राज्य का सफलतापूर्वक संचालन किया। इसी समय की एक तस्वीर जिसमे मिलिट्री बोट में मणिपुर के आकाशवाणी समाचार संवाददाता श्री बी बी शर्मा जी और सेना के जवानों के साथ करांग ज़िले में "अंडर ग्राउंड्स" ग्रुप के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन की कवरेज हेतु "जीवन-रक्षक जैकेट" पहन आकाशवाणी टीम के साथ जाते राय साहब की तस्वीर आज भी उनके साहसी व्यक्तित्व का परिचायक है। समय आगे बढ़ता रहा और अप्रैल 2006 में उनका पुनः तबादला आकाशवाणी गोरखपुर में उपनिदेशक (अभियांत्रिकी) के रूप मे हुआ। राय साहब अप्रैल 2007 में आकाशवाणी गोरखपुर केंद्र के "केंद्राध्यक्ष" बने, तथा 28 अगस्त 2009 तक इसी पद पर काम करते हुए ही आपने अपनी जीवन यात्रा सम्पन्न की।

आकाशवाणी गोरखपुर के प्रमुख (केंद्राध्यक्ष) होने के इस कार्यकाल में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान इस भोजपुरी इलाके के लिए "भोजपुरी समाचार बुलेटिन" को शुरू करवाने में रहा, क्योकि आकाशवाणी वाराणसी में अर्थ-स्टेशन (सेटेलाइट अपलिंकिंग) बनने से गोरखपुर से क्षेत्रीय समाचार एकांश (RNU) के वाराणसी स्थानांतरित होने की जबरदस्त संभावना बनने लगी थी, ऐसे में आपने इस एकांश को बचाने हेतु पूरे उ0प्र0 के अंशकालिक समाचार संवाददाताओं की गोरखपुर में 3 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की, उसमें DG-news को आमंत्रित किया और इन तीन दिनों की इस कार्यशाला के बीच DG-news को गोरखपुर में समाचार एकांश रखे जाने को कन्विंस किया और उनसे दो अतिरिक्त समाचार बुलेटिन शुरू करने की अनुमति की मांग की...इस मांग में पहली बार आकाशवाणी द्वारा "भोजपुरी बुलेटिन" शुरू करने की अनुमति की मांग भी शामिल थी। यह प्रयास सफल रहा। आकाशवाणी के इतिहास में पहली बार भोजपुरी बुलेटिन शुरू करने की अनुमति आकाशवाणी गोरखपुर को मुख्यालय द्वारा मिल गई और नवम्बर 2008 में राय साहब के केंद्राध्यक्ष के कार्यकाल में ही आकाशवाणी के लिए पहली भोजपुरी समाचार बुलेटिन आकाशवाणी के गोरखपुर केंद्र से पढ़ी गई। इस भोजपुरी बुलेटिन को आज भी आकाशवाणी के गोरखपुर, वाराणसी और ओबरा केंद्र रिले करते हैं, जिसे पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक साथ रेडियो पर सुना जाता है। आज भी, लगभग 12 वर्ष बीत जाने के बाद, यह भोजपुरी में पढ़ी जाने वाली और प्रतिदिन प्रसारित होने वाली पूरे विश्व की एकमात्र रेडियो समाचार बुलेटिन है। इसे मौजूदा तकनीकी के युग मे श्रोता कम्प्यूटर या स्मार्टफोन पर newsonair एप्प के माध्यम से देश विदेश में कहीं भी सुन सकते हैं।

वर्ष 1973 से 2009 के बीच लगभग 37 वर्ष की सेवा में स्व. वी. बी. राय ने आकाशवाणी गोरखपुर में इंजीनियरिंग विभाग के लगभग हर पद पर अपनी सेवा दी। यह समयकाल आकाशवाणी गोरखपुर का ऐसा स्वर्णिम काल था जब यह केंद्र अपने विविध कार्यक्रमों, प्रस्तुतियों और उच्च गुणवत्ता के साथ मीडियम वेव और शार्ट वेव प्रसारण के कारण देश-विदेश तक सुना और सराहा जाता था। अपनी मृत्यु के समय भी वे आकाशवाणी गोरखपुर के केंद्र अभियन्ता और केंद्राध्यक्ष के रूप में ही सेवा दे रहे थे। वास्तव में, राय साहब एक ऐसे कर्मयोगी थे जो अपने जीवन के अंतिम क्षण तक आकाशवाणी के लिए समर्पित रहे।

इस महान कर्मयोगी ने 28 अगस्त 2009 को सहारा हॉस्पिटल, लखनऊ में अपनी अंतिम सांस ली। उनका भरा पूरा परिवार आज भी आकाशवाणी को अपना परिवार मानता है और उनके एक पुत्र श्री अजीत कुमार राय वर्तमान में अपने पिता की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए आकाशवाणी गोरखपुर के अभियांत्रिकी अनुभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रसार भारती परिवार ऐसे महान कर्मयोगी की सेवाओं को याद करते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

द्वारा योगदान : श्री अजीत कुमार रायआकाशवाणी गोरखपुरईमेल : ajitrai17@gmail.com

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